“समय से पहले और किस्मत से ज्यादा कुछ नहीं मिलता है।” आप इस कथन से कितने सहमत हैं या फिर असहमत हैं?

अपनी सोच से सावधान रहें वह आपको कभी भी धोखा दे सकती है क्योंकि व्यक्ति की सोच उस समय ऐसी हो जाती है जिसके कारण यह कहा गया है कि समय से पहले और किस्मत से ज्यादा कुछ नहीं मिलता है,

कथा पुरानी है,
एक सेठ जिनके पास काफी दौलत थी उसने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया। बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो, मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो ? सेठ जी कहते कि “जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे…एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया।

सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये दामाद लड्डू लेकर घर से चला, दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया।

उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया। सेठ जी लड्डू लेकर घर आये, सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोडकर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया।सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में। इसलिये कहते हैं कि भाग्य से ज्यादा और समय से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा।

किस्मत साधारण व्यक्ति को विशेष व्यक्ति बना देती है, जिन्दगी के कुछ पहलू ऐसे भी होते हैं जहाँ कर्म नहीं किस्मत बाजी मारती है,
शादी-विवाह के मामले में अक्सर देखने को मिलता है, जिसकी पत्नी विनम्र या अच्छे आचरण वाली होती है, उसका पति उतना ही क्रोधी और आचरणहीन होता हैं,
प्रेम-प्रसंग में अक्सर जिसे हम अपनी जान से ज्यादा चाहते है, उससे कभी शादी नहीं कर पाते हैं,

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