सभी अवतार अमीर के घर ही क्यों पैदा हुए ? जानिए

कौन से अवतार अमीरों के घर मे पैदा हो गए श्रीमान?

मत्स्य, कूर्म, वाराह और नृसिंह तो स्वम्भू हैं, उसपर से मनुष्य भी नही हैं, इसीलिए अमीर गरीब का प्रश्न ही नही है। वामन ऋषि कश्यप के पुत्र थे और परशुराम ऋषि जमदग्नि के। जब ऋषि की संतान हैं तो अमीर कैसे हुए? कल्कि अवतार भी ब्राह्मण के पुत्र होंगे, अर्थात वो भी निर्धन ही होंगे। १० में से ४ अवतार तो मनुष्य ही नही और ३ निर्धन ही हुए। बलराम ने भी लगभग वही झेला जो उनके भाई श्रीकृष्ण ने।

अब आते हैं असली मुद्दे पर जो वास्तव में आप कहना चाहते हैं। श्रीराम और श्रीकृष्ण।

श्रीराम राजा के घर अवश्य पैदा हुए पर जैसा दुख उन्होंने भोगा उस प्रकार का उदाहरण इतिहास में कोई और नही है। १६ वर्ष की छोटी आयु में महर्षि विश्वामित्र उन्हें वन ले गए। राजा बनने वाले थे पर उससे पहले ही २१ वर्ष की आयु में वनवास मिल गया। पिता की मृत्यु हो गयी। वन में १३ साल भटकते रहे और राक्षसों से संघर्ष करते रहे। भरत जैसे भाई का हृदय तोड़ना पड़ा। अंतिम वर्ष में पत्नी का हरण हो गया, पत्नी वियोग में दर दर भटकते रहे। पितृतुल्य जटायु का अंतिम संस्कार किया। बाली को छल से मारने का लांछन उनपर लगा। जैसे तैसे सेना इकट्ठी कर रावण से टकराये और उसका वध किया। युद्ध मे भी अपने भाई को खोते खोते बचे। उनके समक्ष पत्नी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। रावण के वध के कारण ब्रह्महत्या का पाप लगा। उस कारण पुनः परिवार सहित १४ वर्षों का तप किया। परम पवित्र पत्नी पर लांछन लगा। राजा बने पर फिर गर्भवती पत्नी उनके सम्मान हेतु स्वेच्छा से वन चली गयी। राजधर्म में बंधे होने के कारण वे उन्हें रोक भी ना सके। उनके विरह में श्रीराम ने सभी भोगों का त्याग कर दिया और जीवन भर महल में भी सन्यासी के रूप में रहे। अर्थात राजा बनने के बाद भी उन्हें कोई भौतिक सुख नही मिला। पूरे जगत में पत्नी को त्याग देने का लांछन झेलना पड़ा।

पुत्र पैदा हुए तो उनका मुख भी ना देख सके। जब पुत्र मिले तो पत्नी छोड़ कर चली गयी। अश्वमेध यज्ञ किया तो अपने आराध्य भगवान शंकर से ही युद्ध करना पड़ा। शत्रुघ्न को स्वयं से दूर मथुरा भेजना पड़ा। लक्ष्मण जैसे प्राणों से अधिक प्रिय भाई को त्यागना पड़ा। जब निर्वाण लिया तो नितांत अकेले थे। इससे अधिक दारुण जीवन और क्या हो सकता है? वे ईश्वर थे इसीलिए इतना सब झेल लिया, अन्यथा आम मनुष्यों की बात ही क्या।

अब श्रीकृष्ण का जीवन देखिये। जन्म ही कारागार में लिया, वो भी मृत्यु सर पर थी। ६ भाइयों की हत्या हो गयी। माता पिता और नाना कारागार में डाले गए। राजकुमार होकर भी एक यादव के घर गांव में पलना पड़ा। बचपन मे अशिक्षित रहे। बड़े होने तक कंस के राक्षसों से लड़ते रहे। वर्षों तक अपने जन्म देने वाले माता पिता का मुख भी ना देख सके। १६ वर्ष की आयु में स्वयं अपने मामा का वध करना पड़ा। जब सभी अपनी शिक्षा समाप्त कर चुके होते हैं, उस आयु में जाकर उन्हें गुरु मिला। मथुरा में जब तक रहे जरासंध से युद्ध करते रहे।

इससे चिढ़कर पूरे परिवार के साथ पलायन कर द्वारिका में बसना पड़ा। कभी राजा नही बन पाए। पूरे जीवन धर्म के लिए संघर्ष करते रहे। रणछोर और छली जैसे संबोधन उन्हें मिले। नरकासुर से स्वतंत्र कराई गई १६००० कन्याओं के कल्याण हेतु उनसे विवाह करना पड़ा। उसके लिए भी बिना सत्य जाने उन्हें लांछन ही मिला कि इतनी पत्नियां क्यों? जिससे प्रेम करते थे (राधा) उससे विवाह नही कर पाए। जिस माँ (यशोदा) ने पाला, गोकुल से जाने के पश्चात कभी उनका मुख नही देख पाए। अपने भाई शिशुपाल का वध करना पड़ा। शाल्व से युद्ध करना पड़ा। पतियों के होते हुए भी द्रौपदी की लाज उन्हें ही बचानी पड़ी। महाभारत जैसी विभीषिका को संचालित करना पड़ा।

युद्ध के लिए बलराम से विरोध हुआ। अपने संबंधियों द्वारा अपने ही संबंधियों का नाश कराना पड़ा। महाभारत करवाने का सारा ठीकरा उनके सर ही फूटा। छल करने का आरोप लगा। गांधारी का श्राप मिला। स्वयं अपने ही यादवकुल का विरोध झेला। चोरी तक करने का झूठा आरोप उन्हें झेलना पड़ा। पौत्र अपहृत हुआ तो बाणासुर से युद्ध करना पड़ा और उसी युद्ध मे अपने ही आराध्य भगवान शंकर से युद्ध करना पड़ा। राधा और द्रौपदी से पवित्र संबंधों के लिए भी उन्हें उलाहना प्राप्त हुई।

एकलव्य का भी वध अपने हाथों करना पड़ा। अपना ही पुत्र (साम्ब) विरोधी हो गया। अंत मे स्वयं अपने हाथ से सम्पूर्ण यादवकुल का नाश करना पड़ा। एक बहेलिये के हाथों नितांत एकांत में मृत्यु मिली। मृत्यु के बाद भी द्वारिका को लूट लिया गया और स्त्रियों का अपहरण कर लिया गया। द्वारिका समुद्र में डूब गई। इससे बुरा और कुछ हो सकता है?

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