श्री कृष्ण ने अपने पुत्र को इसलिए दिया श्राप, जानिए

भगवान श्री कृष्ण का जीवन सदैव रहस्यों से भरा हुआ था। लोग उनके बारे में जितना भी जानते हैं। उतना ही जानने को बाकी रह जाता है। भगवान श्री कृष्ण अनंत हैं और उनकी कहानियां भी अनंत हैं। पुराणों की एक कहानी के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने अपने ही पुत्र के कोढ होने का श्राप दिया था।

पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के 16108 रानियां थीं। इसमें से एक रानी रीछो के राजा जामवंत की पुत्री थी। जामवंत की पुत्री का नाम जामवंती था। जामवंत ने सतयुग में भगवान राम की पत्नी सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने में भगवान राम की मदद की थी। श्री कृष्ण से युद्ध हारने के बाद जामवंत ने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह भगवान श्री कृष्ण के साथ कर दिया। यह युद्ध 28 दिन तक चला था। इस लड़ाई में जामवंत में भगवान श्रीकृष्ण को पहचान लिया।

भगवान श्री कृष्ण और जामवंती के पुत्र का नाम सांबा था।सांबा बहुत सुंदर और आकर्षक था। जो भी स्त्री सांबा को देख लेती थी उसके मन में उसके लिए कामवासना जागृत हो जाती है। भगवान श्री कृष्ण की एक रानी को भी सांबा के प्रति कामवासना जागृत हो गई। उसने सांबा की पत्नी का रूप बनाया। सांबा के गले में लग गई।

वहीं से भगवान श्रीकृष्ण गुजर रहे थे। उन्होंने जब यह देखा तो तो क्रोधित होकर अपने पुत्र सांबा को श्राप दे दिया कि वह कोढ़ी हो जाए। इस श्राप से मुक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से सांबा महर्षि कटक के पास पहुंचा। उसने महर्षि कटक से प्रार्थना की कोई उसे इस इस शाप से मुक्ति दिलाएं।

महर्षि कटक ने सांबा को उपाय बताया कि वह भगवान श्री सूर्य की उपासना करें। सांबा ने चंद्रभागा नदी के तट पर मित्रवन में सूर्य देव का एक मंदिर बनवाया और कई सालों तक सूर्य भगवान की कड़ी तपस्या की।

सूर्य देव ने सांबा की तपस्या से प्रसन्न हो गये। उसे कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए चंद्रभागा नदी में नहाने के लिए कहा। इसके बाद सांबा का कोढ़ सही हो गया। ऐसी मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति का कोढ़ ज ठीक हो जाता है।

श्रीकृष्ण के श्राप से मुक्ति पप्राप्त पाने के लिए सांबा ने सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था, जो अब पाकिस्तान के मुल्तान शहर में है। इस सूर्य मंदिर को आदित्य मंदिर भी कहते हैं।

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