शादी शुदा स्त्री के पैन कार्ड में भी पिता का ही नाम क्यों होता है जबकि पति का क्यों नहीं?

एक बार एक अनुराधा तिवारी के पिता परमेश्वर तिवारी ने अपनी बालिग बेटी का पैन कार्ड बनवाया। कुछ वर्षों तक वे उसका आयकर रिटर्न भरते रहे। सब कुछ ठीक था। पैन कार्ड पर नियमानुसार उनकी बेटी का नाम, जन्म की तारीख, और उनका नाम पिता के तौर पर दर्ज था। चूंकि पिता आयकर की अच्छी जानकारी रखते थे, इसलिये आयकर विभाग के तरफ से कोई दिक्कत नहीं थी।

कुछ वर्षों बाद अनुराधा की शादी एक गैर वाणिज्यिक पृष्ठभूमि वाले बंदे के साथ हुई। नाम था सुरेश्वर शुक्ला। शादी के बाद पिता ने उन्हें औपचारिक रूप से आयकर फ़ाइल और रिटर्न्स के बारे में बताया साथ ही यह भी बताया कि अब उनकी बेटी की शादी हो चुकी है, तो दामाद जी चाहे तो उनकी बेटी के पैन कार्ड पर विवरण बदलवा सकते है। (उनका आशय नाम में परिवर्तन को ले कर था।)

दामाद जी को बस यही समझ आया कि विवरण बदलने की कार्यवाही की जा सकती है। पहली बार पैन कार्ड देखते हुए उन्होंने पत्नी के पैन कार्ड पर उसके पिता का नाम देखा। उनको बहुत अजीब लगा। लेकिन उन्हें बताया गया था कि विवरण बदले जा सकते है। इसलिये उन्होंने निश्चय कर लिया कि पिता के नाम की जगह अब उनका नाम होगा। शायद उनका अहम और मालिकाना हक जो उनका उनकी पत्नी पर था, वह ऊपर आ रहा था।

अगले दिन वे उनके पिता के दफ्तर पहुंच गए और उन्हें अपना अनुरोध खुले शब्दों में प्रेषित कर दिया।

  1. पत्नी का नाम: अनुराधा तिवारी की जगह अनुराधा तिवारी शुक्ला,
  2. जन्म दिन: पहले जैसा,
  3. पिता का नाम: परमेश्वर तिवारी की जगह, पति का नाम: सुरेश्वर शुक्ला।

होना चाहिए, साफ साफ कह दिया। परमेश्वर जी ने दामाद के लिये जलपान आदि की व्यवस्था करवाई। जलपान से निवृत होने के बाद, पिता जी ने उन्हें हँसते हुए समझाया कि नाम अनुराधा तिवारी शुक्ला तो ठीक है। जाहिर है, उसकी शादी सुरेश्वर शुक्ला से हुई है तो अनुराधा तिवारी से अनुराधा तिवारी शुक्ला किया जाना चाहिये, हालांकि खुद अनुराधा ये बदलाव नही चाहती थी। अब ठहरी नए जमाने की नारी, अपना नाम क्यों बदलना चाहेंगी। लेकिन पिता ने समझाया कि इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता तो वे मान गयी।

लेकिन उनके दामाद सुरेश्वर शुक्ला जी तो जिद पकड़ कर बैठ गए कि उन्हें तो पिता की जगह पति का नाम ही डलवाना है। अनेक कोशिश के बावजूद वे समझने को तैयार नहीं हुए। तब उनके पिता ने उन्हें समझाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के विवरणों में कुछ विवरण परिवर्तनशील है। इसमें पति का नाम भी शामिल है।

मसलन अगर स्त्री अपने पहले पति को तलाक दे दे और दूसरी शादी कर ले तो उसके पति का नाम बदल जायेगा। इस प्रकार जाली दस्तावेज के आधार पर एक ही व्यक्ति एक से अधिक पैन कार्ड के आवेदन कर के हासिल कर सकता है और एक से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल कर के सरकार से न्यूनतम छूट की राशि का लाभ दोनो पैन कार्ड पर ले सकता है। इसी दुविधा से बचने के लिये आयकर विभाग ने पैन के आवेदन पर पिता का नाम (एक अपवाद की स्थिति को छोड़ कर) अनिवार्य किया है। (कदाचित इसी खामी की वजह से आज एक व्यक्ति एक से अधिक मतदाता पत्र बनवा कर आराम से एक से अधिक राज्य का मतदाता बन जाता है।)

लेकिन जन्म से मृत्यु तक एक व्यक्ति के ये तीन विवरण ऐसे है जो कभी नहीं बदल सकते, चाहे वह कितनी भी शादियां करे या तलाक दे। ये तीन विवरण,

  1. उसके मूल नाम,
  2. उसके जन्म तिथि और
  3. उसके पिता का नाम।

परमेश्वर जी समझाएं और सुरेश्वर जी ना समझें, ऐसा हो नही सकता। पति को पिता से हार माननी पड़ी। आखिर पिता जन्म से है, पति विवाहोपरांत से ही है। तो पिता को तो भारी पड़ना ही था।

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