शनि शिंगनापूर में घरों में ताला नहीं लगाने वाली बात में कितनी सच्चाई है ,जानिए

यहां आज भी घरों से लेकर बैंकों तक में नहीं लगते ताले, सालाना चढ़ता है करोड़ों का तेल

शनिदेव का नाम सुनते ही लोगों के जहन में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई तरह के चित्र कौंधने लगते हैं।

बिना ताले का बैंक।

नागपुर.शनिदेव का नाम सुनते ही लोगों के जहन में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई तरह के चित्र कौंधने लगते हैं। अधिकांश शनि के प्रकोप की बातें सुनकर कांप जाते हैं। शनि जयंती के विशेष मौके बता रहे हैं देश के सबसे बड़े शनि शिंगणापुर मंदिर की पुरानी मान्यताओं से लेकर वर्तमान स्वरूप तक की स्थिति।
बैंक के दरवाजे भी खुले रहते हैं… बैंक के दरवाजे भी खुले रहते हैं – शनि शिंगणापुर यूको बैंक एक मात्र बैंक है, जिसके प्रवेश द्वार पर ताला नहीं होता। रात में बिना ताले के दरवाजा खुला छोड़ते हैं। – नियमों के तहत प्रति दिन कारोबार मुख्य बैंक में स्थानांतरित होता है। बैंक में ताला नहीं है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। – इस गांव के घरों में लोग सालों से चाेरी हाेने के डर के बिना ही रहते आए हैं इसलिए यहां के घरों में ताले नहीं लगाए जाते। – साथ ही यहां की दुकानों में ताले तो दूर किसी तरह के दरवाजे या शटर भी नहीं लगवाए गए हैं और दुकानदार बेखौफ कारोबार करते हैं।

शनि को कोई नाराज नहीं करता – शनि महाराज को नाराज नहीं किया जा सकता। कोई करता भी नहीं। यही कारण है कि करैकल के शनि मंदिर में धर्म और आस्था का बाहरी आवरण छोड़कर हर धर्म और संप्रदाय के लोग पूजा करने आते हैं। – मनौती मांगते हैं और यह बताने वालों की कमी नहीं है कि मनौती पूरी होने पर वे आभार प्रकट करने आए हैं। शनि की साढ़े साती और अढ़ैया की दशा के प्रकोप से बचने के लिए दूर दूर से करक्ल पहुंचते हैं।

गणेश सरोवर में स्नान, पूजा और नारियल फोड़ने के बाद शनि मंदिर संकुल में करीब दर्जन भर स्थानों पर माथा टेकते हैं। आर्शीवाद पाते हैं। – कष्ट हरण में शनि महाराज धर्म, संप्रदाय, जाति का भेद नहीं बरतते। मंदिर में वेदपाठी और तमिल पदों के ज्ञाता और गायक पुजारी हैं।
हमें बताया गया कि पुजारी वर्ग में जात-पांत की शर्त नहीं है। शनि का वाहन है, कौआ – शनि की पूजा के लिए करैकल पहुंचने में असमर्थ लोगों के लिए मंदिर प्रशासन ने ई-पूजा की व्यवस्था कर दी है। कौआ महाराज मंदिर परिसर में मिल जाएंगें और देश भर में किसी अन्य स्थान पर भी।

करैकल के कौओं की अपनी खासियत है। भारत के मंदिरों के पुजारियों की तरह कौए भक्तों पर झपटते नहीं हैं। दूर से ताकते रहते हैं। – मानों शनि महाराज ने आश्वस्त कर रखा होगा-कोई भक्त तुम्हारी अनदेखी करने की जुर्रत नहीं कर सकता। – शनि के वाहन का रुतबा कायम है। तिरुनल्लार शनीश्वरन मंदिर करैकल में है। तिरुनल्लार करैकल का उपनगर या गांव कहा जा सकता है। – करैकल जाने के लिए तमिलनाडु के कुंभकोणम, तंजावुर या त्रिची बड़े रेलवे स्टेशन हैं। त्रिची और मदुरै देश के अन्य हिस्सों से विमान सेवा भी है। अधिकांश श्रद्घालु बसों से चेन्नई, त्रिची और कोच्चि से भारी संख्या में पहुंचते हैं।

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