लोनार झील” का पानी अचानक क्यों हो गया है “गुलाबी”

महाराष्ट्र का बुलढाणा जिला यहां पर एक लोनार झील है। काफी फेमस झील है। यह राष्ट्रीय विरासत भी है। यानी देश के लिए बेहद जरूरी कई लोग हर साल इसे देखने के लिए आते हैं। इस झील के पानी का रंग हरे से अपने आप गुलाबी हो गया है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भयंकर वायरल हो रही है। देखने वाले भी हैरान है क्योंकि 31 मई 2020 तक इसका पानी हरा दिखता था, लेकिन 10 दिन के अंदर ही यह पानी गुलाबी रंग का हो गया है। कोई सही कारण तो पता नहीं चल पाया है, लेकिन एक्सपर्ट्स पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ अंदाजन कारण जरूर सामने आए हैं।

लोनार झील संरक्षण और विकास के सदस्य हैं गजानंद खरात उन्होंने पीटीआई को बताया कि झील का पानी काफी खारा है। उसका पीएच लेवल 10 पॉइंट 5 है। इसके अलावा झील में काई भी हो ऐसा हो सकता है कि इनकी वजह से पानी का रंग बदल गया हो। वह कहते हैं। की झील के पानी की सतह से 1 मीटर नीचे जाने पर ऑक्सीजन मौजूद ही नहीं है। पानी में काई है। खरापन भी काफी ज्यादा है। इसके कारण हो सकता है कि रंग बदला हो। इस तरह की एक झील इजराइल में भी है जहां पानी में खारापन बढ़ने के कारण उसका रंग हरा था जो लाल हो गया।

इसके अलावा खरात ने पानी के लेवल को भी कारण बताया। उनके मुताबिक पिछले कुछ सालों में झील में पानी का लेवल कम हुआ है और अभी बारिश भी नहीं हुई है जिससे नया पानी झील में आ सके। वह कहते हैं कि हो सकता है कि पानी की मात्रा कम होने से खारापन और बढ़ गया हो और काई के बर्ताव में बदलाव आ गया हो वातावरण भी बदल रहा है। यह सब रंग बदलने का कारण हो सकते हैं। गजानंद खरात ने यह भी साफ कहा कि इसके पहले भी झील के पानी का रंग बदला है, लेकिन यह पहली बार है जब सबसे ज्यादा बदलाव आया है।

औरंगाबाद में डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी इसकी जोग्राफी डिपार्टमेंट के हेड है। डॉक्टर मदन सूर्यवंशी उनका कहना है कि यह इंसानों की वजह से नहीं हुआ है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से वहां कोई जा भी नहीं रहा है। यह एक प्राकृतिक घटना है। सामान्य तौर पर फंगस पानी को हरा रंग देता है। लेकिन झील का जो रंग बदला है वह जैविक परिवर्तन के कारण हुआ है मौसम के हिसाब। से पानी में बदलाव होता रहता है।

हो सकता है कि ऐसा ही कुछ लोनार में भी हुआ हो। हम सब बदलाव को ठीक से तभी पता कर सकते हैं। जब हम वहां पर जाएं लोनार झील करीब 50 हजार साल पहले बनी थी। जब धरती की सतह से एक उल्कापिंड टकराया था। इसका व्यास यानी की चौड़ाई 1 पॉइंट 2 किलोमीटर है।

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