रेलवे फाटक पर तैनात गेटमैन को कैसे पता चलता है कि ट्रेन आने वाली है ताकि वह फाटक बंद कर सके? जानिए

प्रत्येक गेट हट में रेलवे टेलीफोन होता है, जिस पर फ़ोन कर, स्टेशन मास्टर गेट मैन को सूचित करता है, कि अमुक ट्रेन संख्या 12345 आ रही है, गेट बंद कर ले। तो स्टेशन मास्टर से ही – गेट मैन को पता चलता है कि ट्रेन आनेवाली है । आमतौर पर गेट बंद होने की संपुष्टि होने के बाद ही स्टेशन मास्टर सिग्नल डाउन/ग्रीन करता है।

क्या होगा यदि स्टेशन मास्टर, पहले सिग्नल डाउन/ग्रीन कर दे और गेट मैन को सूचित बाद में करे ?
गेट का बूम या गियर खराब होने पर गेट बंद नहीं होगा या गाड़ियों से गेट जाम हो जाए तो भी गेट बंद नहीं होगा, और यदि इसी बीच ट्रेन आ जाए, तो दुर्घटना हो सकती है। इसीलिए, पहले गेट मैन कन्फर्म करता है – कि उसने गेट बंद कर दिया है, तभी स्टेशन मास्टर सिग्नल डाउन/ग्रीन करता है।

क्या होगा यदि टेलीफोन खराब हो जाए या गेट मैन फ़ोन न उठाए ?
स्टेशन मास्टर, यह मानेगा कि वह गेट खराब हो गया है, और ट्रेन के ड्राइवर को लिखित में सूचित किया जाएगा कि गेट संख्या क ख ग खराब हो गया है, सो उस गेट के समीप प्रतिबंधित गति (आमतौर पर 15 किलोमीटर/घंटा) से चले और गेट के पहले रुकें और पटरी साफ रहने पर ही गुजरें।

गेट मैन को सूचित न कर पाने का – सिग्नल पर क्या असर पड़ता है ?
गेट दो तरह के होते हैं।

इंजीनियरिंग गेट
ट्रैफिक गेट
नीचे चित्र में इंजीनियरिंग गेट दिखाया गया है [1]

ऊपर चित्र में E लिखा हुआ है । E से इंजीनियरिंग।

ट्रैफिक गेट होने पर E की जगह T लिखा होता है ।

99% इंजीनियरिंग गेट पर गेट मैन को सूचित न कर पाने का सिग्नल पर कोई असर नहीं पड़ता है।

इसके उलट 99% ट्रैफिक गेट पर गेट मैन को सूचित न कर पाने का सिग्नल पर असर पड़ता है और ट्रेन को रुकने की जरूरत पड़ सकती है।

यदि 1 से ज्यादा ट्रेन गुजरने वाली है, तो स्टेशन मास्टर यह तथ्य भी ट्रेन नंबर समेत गेट मैन को बताता है – टेलीफोन द्वारा ।

मोबाइल से क्यों नहीं बताया जाता है ?
एक, रेल के बहुत सारे गेट ऐसी जगह हैं, जहाँ मोबाइल नेटवर्क कतई विश्वसनीय नहीं है।
दो, गेट मैन, बगैर गेट पर सशरीर मौजूद हुए भी, मोबाइल उठा कर बातें कर सकता है। सो कोई मोबाइल नहीं। स्थावर रेलवे फोन से बात ही मान्य है।

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