रावण अपने जीवन में किन किन योद्धाओं से पराजित हुआ था?

भगवान शंकर: रावण महादेव से युद्ध करना चाहता था किन्तु महादेव ने उससे इस प्रकार युद्ध किया जैसे वो कोई बालक हो। तब रावण ने क्रोध में आकर कैलाश के शिखर को उठा लिया। तब महादेव ने हँसते हुए अपने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबाया जिससे रावण का हाथ पर्वत शिखर के नीचे दब गया। तब रावण ने रोते हुए शिवस्त्रोत्रताण्डव की रचना की जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उसे मुक्त किया और चन्द्रहास खड्ग भी प्रदान किया। कुछ लोग भगवान शंकर को इस सूची में नही गिनते हैं क्योंकि भला उनसे कौन जीत सका है?

दैत्यराज बलि: एक बार रावण पाताललोक पहुंचा जहाँ उसकी भेंट प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि से हुई। रावण ने उन्हें युद्ध की चुनौती दी पर बलि ने उससे अनुरोध क्या कि वो उनके बाजूबंद उन्हें दे दे। किन्तु रावण से बलि का बाजूबंद तक नहीं उठा। तब रावण चुप चाप वहाँ से ये सोच कर चला गया कि जब वो उनका बाजूबंद नहीं उठा सका तो उन्हें क्या परास्त करेगा।

कर्त्यवीर्य अर्जुन: रावण महिष्मति पहुंचा तो उस समय सहस्त्रार्जुन स्नान कर रहा था। अपनी पत्नी के कहने पर उसने अपने १००० हाथों से सरोवर का जल रोक लिया जिससे रावण का बनाया शिवलिंग खंडित हो गया। क्रोध में आकर रावण ने सहस्त्रार्जुन को ललकारा। दोनों में घोर युद्ध हुआ किन्तु अंत में कार्तीवीर्य अर्जुन ने रावण को परास्त कर बंदी बना लिया। बाद में रावण के दादा महर्षि पुलत्स्य के कहने पर उसने रावण को छोड़ा।

वानरराज बाली: रावण ने किष्किंधा में बाली को भी ललकारा था। बाली उस समय पूजा कर रहा था किन्तु बार बार रावण द्वारा ललकारे जाने पर उसने रावण को अपने कांख में दबा लिया और ६ महीने तक उसे लेकर उड़ता रहा। बाद में उसने रावण को मुक्त किया। उसके बाद दोनों में मित्रता हो गयी।

असुरराज शंभर: शंभर रावण का रिश्तेदार ही था। एक बार जब रावण शंभर के यहाँ अतिथि के रूप में था तो उसने शंभर की पत्नी माया से दुराचार किया। इससे क्रोधित होकर शंभर ने रावण से युद्ध किया और उसे बंदी बना लिया। बाद में शंभर इंद्र के साथ युद्ध के लिए चला गया जिसमें उसकी मृत्यु हो गयी। ये वही युद्ध था जिसमे दशरथ ने इंद्र की सहायता की थी और कैकेयी को दो वरदान मांगने को कहा था। बाद में माया के कहने पर रावण को मुक्त कर दिया गया और माया अपने पति के साथ सती हो गयी।

श्रीराम: राम-रावण युद्ध तो प्रसिद्ध है ही। श्रीराम ने दो बार रावण को युद्ध में परास्त किया था और अंततः ब्रह्मास्त्र से उन्होंने रावण का वध कर पूरे संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

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