ये सेना के लोग हनीट्रैप कैसे हो जाते हैं?

आजकल लोग हनीट्रैप में कैसे फंस जाते हैं?

“हनीट्रैप”

आईये, पहले जानते हैं कि ये हनीट्रैप होता क्या है?

‘हनीट्रैप को हिंदी में विषकन्या कहते हैं, जो कि खुद ही अपनी परिभाषा बता रहा है।’

जैसा नाम से ही जाहिर है हनी यानि शहद और ट्रैप मतलब जाल। एक ऐसा मीठा जाल जिसमें फंसने वाले को अंदाजा भी नहीं होता कि वो कहां फंस गया है, और किसका शिकार बनने वाला है। खूबसूरत महिला एजेंट्स मर्दों को अपने हुस्न के जाल में फंसाती हैं और उनसे महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेती हैं।

अभी तक का ट्रेंड देखें तो पता चलता है कि सोशल मीडिया के जरिए सेना से जुड़े लोगों को फंसाया जाता है। ये जरूरी नहीं कि सामने जो लड़की बातें कर रही है वो वास्तव में लड़की ही हो। कई बार पुरुष एजेंट, महिला बन कर बातें करते हैं। इसके लिए फेक प्रोफाइल्स बनाई जाती हैं। ये इस कदर असली दिखती हैं कि इन पर भरोसा कर लिया जाता है।

कहते हैं इंसान की सबसे बड़ी सच्चाई उसकी पहचान होती है, लेकिन हनी ट्रैप की असली पहचान कभी जाहिर ही नहीं होती। हनी ट्रैप के मिशन पर निकली महिला दोस्ती की आड़ में न सिर्फ जानकारियां हासिल करती है बल्कि कई बार अहम दस्तावेज भी उनके हाथ लग जाते हैं। कई मामलों में महिला सिर्फ लच्छेदार बातों का ही सहारा नहीं लेती बल्कि अपने शिकार को ब्लैकमेल भी करती है। अगर शिकार की कोई आपत्तिजनक तस्वीर या खास बातचीत की कोई डिटेल हाथ लग जाए तो उसे जगजाहिर करने की धमकी भी दी जाती है। बदनाम होने के डर से वो शख्स अहम से अहम राज भी उगल देता है।

कई केसों में ऐसा देखा गया है कि लड़की खुद को किसी यूरोपियन देश या फिर अमेरिका का बताती है। कई बार लड़की खुद को किसी अखबार या मैगजीन से जुड़ा बताती है। ऐसे में यह लोग सेना अधिकारियों को थोड़ी जानकारी देने के एवज में अच्छा पैसा ऑफर करते हैं।

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