मृत्यु के समय सिराहने कौन सी 3 चीज रखने से सारे पापों को माफ़ कर देते हैं यमराज? जानिए

हाँ बिल्कुल ऐसी 3 वस्तुएं है जो मृत्यु के समय सिरहाने पर रखने से यमराज सारे पापों को माफ कर देते है मगर सिरहाना क्या है??तो सिरहाना अर्थात वो तकिया जो रात्रि को हम सोते समय सिर के नीचे रखते है तो इसी तरह से यदि हम पूरे जीवन भर अपने सिर अर्थात अपनी बुद्धि में वो तीन वस्तुएं रखे तो यमराज सारे पाप माफ करते है,अब सारी उम्र क्यों??तो भाई मृत्यु का तो पता किसी को है नही ओर मृत्यु के बाद यदि कोई घरवाला किन्ही तीन वस्तुओं को सिरहाने रखे तो पता नही यमराज पाप करे याँ नही मगर यदि हम जीते जी ही स्वयम ही इन तीन वस्तुओं को जो मैं बताने वाला हूँ।

उन्हें ही अपने सिर का तकिया बनाकर हमेशा अपनी बुद्धि में विराजमान रखे तो यमराज हमारे पाप जरूर माफ करेंगे और वो तीन वस्तुए है ज्ञान ,भक्ति , वैराग्य , यही वो तीन वस्तुए है जो हमे हमारे पापों से मुक्त करवा सकती है,ओर स्वयम श्री मद भागवत में यमराज भी इन तीन चीजों के बारे में कहते है कि जिन जीवो के पास ये वस्तुए होती है उन जीवो को मेरे यमदूत नही पकड़ते,

तो ज्ञान कौन सा तो ज्ञान बहुत से है देवी देवताओं का ज्ञान,सन्सार का ज्ञान ,इत्यादि ढेरो सारे ज्ञान,मगर इन सभी का ज्ञान एक जन्म में हो पाना सम्भव नही है तो फिर ज्ञान वो जो मुक्ति प्रदान करे और पापों से मुक्त करें तो वो है श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान,ओर स्वयम भगवान श्री कृष्ण जी गीता के अध्याय 18 में कहते है कि जो जीव मेरे कहे अनुसार आचरण करता हुआ सारी उम्र मेरी भक्ति करता हुआ सिर्फ मेरी ही शरण ग्रहण करता है तो मैं उसके सारे पाप क्षमा कर देता हूँ,ओर इसीलिए यदि श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान हो जाये तो देवी देवताओं और सन्सार का ज्ञान स्वयमेव ही हो जाता है ,

ओर इसीतरह से ज्ञान के अनुसार भक्ति करना याँ ईश्वर का नाम जप करना तो ये दूसरी वस्तु है जो ज्ञान के अनुसार करनी चाहिए क्योंकिं भक्ति के भी इस सन्सार में बहुत से मार्ग है मगर मुक्तिदायक कौन सा है इसका पता सिर्फ श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान के बाद ही चलता है,ओर इसी तरह से ज्ञान ओर भक्ति के बाद वैराग्य तीसरी वस्तु है जो हमे पापों से मुक्त करवाती है तो इसका अर्थ है कि सन्सार में किसी भी तरह की आसक्ति ना रखते हुए अपनी सारी आसक्ति केवल एक ईश्वर प्राप्ति में ही रखनी चाहिए अर्थात जैसे भग्वद्गीता में भगवान श्री कृष्ण जी कहते है कि जीव को सन्सार में ऐसे रहना चाहिए जैसे जल में कमल रहता है यानी कि पानी मे तो रहो मगर गीले ना होने पाओ तो इन तीन वस्तुओं को सारी उम्र अपनी बुद्धि के सिरहाने पर रखने से यमराज हमारे पाप क्षमा करते है,

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