भारत में हर औरत करवा चौथ का व्रत करती है।लेकिन फिर भी विधवा हो जाती है। फिर सब औरतें करवा चौथ का व्रत क्यों करती हैं? जानिए

हर एक रिवाज के पीछे एक परम्परा होती है। यह परम्परा कार्तिक माह के चौथे दिन पालन किया जाता है।

इतिहास :

करवा नाम की एक स्त्री जो अपने पति से बहुत प्यार करती थी। उसने अपने प्यार को मगरमछ से बचाया था। अपने पति के खातिर यम से भी लढ गयी थी, उससे संतुष्ट हो कर यमराज ने उसके पति को दीर्घायु कर दिया था।


सावित्री का पति सत्यवान के मर जाने के बाद जब यमराज उसे लेने आये, तो सावित्री ने अपने पति को जिंदा करने की यम से प्रार्थना की। जब यमराज ने मना कर दिया, तो सावित्री ने खाना- पीना छोड़ दिया। उसके इस प्यार से प्रसन्न होकर यमराज ने उसे पति की जिंदगी छोड़ के कोई भी एक वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने बच्चे की माँग की, तो इसके लिए यम को उसके पति को जिंदा करना पड़ा।


रानी वीरावती ने अपने पहले करवा चौध का व्रत रखा था। चंद्रमा के आने में विलंब हुआ तो उसके भाइयों ने उसे कृत्रिम रोशनी दिखा दिया और उसने व्रत तोड़ दी। फिर पता चला कि उसके पति बीमार हो गए। वह भगवान शिव और माता पार्वती से अपने पति के लिए दुआ मांगने लगी। माता पार्वती ने कहा कि व्रत का सही पालन नही हुआ, इसी वजह से ऐसा हुआ। लेकिन अगर वह हर साल श्रद्धा से करवा चौध का व्रत रखेगी, तो उसके पति सही हो जायेंगे। वीरावती ने उसके बाद हर साल इस व्रत का पालन किया।
अस्वीकरण -: उपरोक्त कहानियाँ लोक कथाओं पर आधारित हैं। अब आते हैं आपके सवाल पर कि यह व्रत रखने से होता क्या है?

व्रत रखने का कारण -:

औरतें करवा चौध से अपने पति को यम के द्वार से ला पाएंगे या नहीं, यह जरूरी नहीं। लेकिन अगर अपनी पति के लिए अन्न जल छोड़ कर श्रद्धा से कोई व्रत रखता है, उससे उनमें प्यार बढ़ता है और सम्मान भी।

लेकिन अगर कोई करना नहीं चाहता, उसको करना भी नहीं चाहिए।
अगर आप इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि सब कर रहे हैं, तो भी आप मत कीजिये।
अगर आप दिखावा के लिए कर रहे हैं, तो भी इससे करने की आवश्यकता नहीं।
मन में श्रद्धा ना हो, तो भक्ति, व्रत, पूजा आदि का करना निष्फल होता है। विधवा होना या ना होना किसीके हाथ में नहीं लेकिन त्याग, व्रत और तपस्या से देवता प्रसन्न जरूर होते हैं। संसार में किया कोई कर्म बेकार नहीं जाता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »