भारत के हर एक पुलिस स्टेशन में सैकड़ों गाड़ियां खुले में सड़ती रहती हैं आखिर सरकार करोड़ों रुपए का मूल्य के गाड़ियों को क्यों सड़ने देती है? जानिए

आप भारत के किसी भी पुलिस थाने को देखिए… थाने के पिछवाड़े या थाने के प्रांगण में सैकड़ों हजारों कारें जिसमें तमाम लग्जरी कारें भी होती हैं, बहुत से बाइक आदि पड़े पड़े सड़ते रहते हैं

दरअसल इसमें 3 तरह के वाहन होते हैं

पहले तरह के वाहन होते हैं जो केस प्रॉपर्टी होते हैं जैसे किसी मर्डर, चोरी या किसी अन्य गुनाह में जब किसी गाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है तब पुलिस उस गाड़ी को सीज कर देती है ताकि उसे सुबूत के रूप में पेश किया जा सके और जब तक वह केस चलता है तब तक वह गाड़ी केस प्रॉपर्टी के रूप में सड़ती रहती है.

दूसरी तरह की गाड़ियां चोरी की होती हैं जिसमें पुलिस मूल मालिक का पता लगाने की कोशिश करती है और यदि पता नहीं लगता है तब वह गाड़ी लावारिस पड़ी रहती है।

तीसरी तरह की गाड़ियां वह होती है जो विदेशों से ड्यूटी चोरी करके इंपोर्ट की गयी होती है उन्हें भी पुलिस जप्त कर लेती है और जब तक मालिक पूरा ड्यूटी चुका नहीं देता तब तक वह गाड़ियां नहीं छोड़ी जाती है।

हालांकि कई बार पुलिस अदालत से इजाजत मिलने के बाद ऐसी गाड़ियों की नीलामी भी करती है जिसमें आपको सस्ते दाम पर अच्छी गाड़ियां मिल सकती हैं ।

आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में पता लगाते रहिए कि वहां कब ऐसी गाड़ियों की नीलामी होती है

लेकिन दुख इस बात का होता है कि जब तक ऐसी गाड़ियां की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होती है तब तक यह गाड़ियां एकदम सड़ कर कबाड़ बन चुकी होती हैं और इन्हें सिर्फ कबाड़ी वाले ही खरीद सकते हैं।

अब आप देखिए कैसी कैसी लग्जरी गाड़ियां पुलिस थानों में पड़ी हुई सड़ रही हैं

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