बैंक वाले चेक के पीछे हस्ताक्षर क्यों करवाते हैं?जबकि वहां हस्ताक्षर के लिए मार्क नहीं होता है

मान लो की कोई खाताधारक बँकसे अपने पैसे निकालने हेतू अपना चेक जमा कर देता है, खजांची उसे पैसे दे देता है। वो घर चला जाता है।

काम खतम।

पर क्या होगा, जब थोडेही देरमे वही आदमी खजांचीसे कहता है की मेरा टोकन गुम हो गया, आप मुझे पैसे दे दिजीए।

अब खजांची के पास तो पैसे देनेका कोई सबुत नही है।

ऐसी अवस्थामे चेक के पिछे किया हुआ हस्ताक्षर काम मे आता है।

ये मात्र नियमो के अनुसार पाली गई एक सुरक्षा व्यवस्था है। मेरे चालिस साल की करिअर मे मैने कभी किसींको दुबारा पैसे मांगते हुवे नही देखा।

ये इसिलीये भी किया जाता है की टोकन लेनेके बाद अगर सचमे वो उसे घुमा देता है, और कोई गैर आदमी पैसे लेने बँक मे आता है, तो वो सही हस्ताक्षर कर नही पायेगा और पकडा जायेगा।

और एक बात है।

जब बेअरर चेक से पैसे लेनेवाला बादमे पैसे मिलने से इन्कार करता है, तब ये हस्ताक्षर उसे पकडवा सकते है। आपको याद होगा की बेअरर चेक से बडी रकम निकलनेवाले के हस्ताक्षर ऊसके पॅन कार्डसे मिलानेके बाद ही खजांची उसे पैसे दे देता है, साथमे उसका पॅन नंबर भी लिख लेता है।

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