बदमाशों द्वारा 2 रूपये के सिक्के को रेल की पटरियों पर रखकर सिग्नल जाम कैसे किया जाता था ? जानिए सच

रेल की पटरियां दो तार की तरह मानिए जिसमें वोल्टेज होता है। क्योंकि तार भी एक हद तक लंबा हो सकता है इसीलिए बीच बीच में पटरियों में भी ज्वाइंट लगाना होता है।

कुछ टेक्निकल कारण से ज्वाइंट के पास वोल्टेज की पोलारिटी को बदल दिया जाता है। अब जब रेल गाड़ी इस पटरी पर आती है तो वोल्टेज को शॉर्ट करती है और पीछे का सिग्नल लाल हो जाता है।

अब अपराधी भी पढ़े लिखे लोग है तो उन्हें यह पता है। तो जहां ज्वाइंट होती है वो लगभग 5 मिलीमीटर का इंसुलेशन होता है। अगर कोई भी कंडक्टर से दोनों पटरियों को शॉर्ट किया जाएगा तो पीछे का सिग्नल लाल हो जाएगा ।

यह काम कोई भी सिक्का कर देता है। अब जब सिग्नल लाल हो जाती है तो आने वाली ट्रेन धीरे होते हुए रुक जाती है। अब चोर बीच रास्ते रुकी हुई ट्रेन में चोरी करते है।

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