प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग अक्सर कौनसी गलती क़र बैठते हैं?

चाहे आप कितने भी कुशल हो, सीखना न छोड़े। कुछ लोग भाग अपने घमंड में यह मान लेते हैं कि उनके बिना कंपनी नहीं चलेगी। यह एक बहुत बड़ी गलती है। अगर आप मैनेजमेंट में हैं तो शायद कुछ फर्क पड़ भी सकता है। लेकिन याद रखिये कि हर व्यक्ति को बदला जा सकता है चाहे फिर वो CEO ही क्यों न हो। कहने का मतलब अपने पद को लेकर ज्यादा निश्चिन्त ना रहें।

दूसरी बड़ी गलती अपनी तुलना दूसरे कर्मचारियों से करना। हर कंपनी में लगभग 20:80 का नियम लगता है यहाँ पर 20 प्रतिशत लोग लगभग 80 प्रतिशत काम करते हैं और काफी लोग सिर्फ आराम करते नज़र आते हैं। अब ऐसे लोगों को देखकर मेहनत करने वाले लोग नाहक ही निराश हो जाते हैं। सब अपनी अपनी किस्मत के हिसाब से कमाने में लगे हुए है। आप अपने काम से मतलब रखिये।

समय का महत्व ना रखना। अक्सर लोग देर से आते हैं और देर से ही जाते हैं। समय पर आइए और समय पर निकल लें। काम तो सारी जिंदगी चलेगा , परिवार भी महत्वपूर्ण है।

अपनी मजबूरी मत दिखाए। कुछ लोग अपनी दुखी हालत कंपनी में सांझा कर लेते हैं और बता देते हैं कि यह नौकरी उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह एक गलती है , दूसरे लोग आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर आपको काम ज्यादा देंगें और मालिक आय कम।

अधिक समय तक टिके रहना। यह नहीं कह रहा कि आप एक जॉब से दूसरे जॉब पर छलांग ही लगाते जाए। पर अगर आपके काम की इज्जत नहीं हैं तो अच्छा हो कहीं दूसरी जगह नौकरी ढूंढ़े। 10 एक साल के बाद तो मालिक को भी लगने लगता है कि फलाना कर्मचारी कहीं जाने के लायक ही नहीं है और फिर आपकी इज्जत भी कम हो जाती है। लॉयल्टी का मतलब यह नहीं कि आप सारी जिंदगी एक कंपनी में ही लगे रहें बल्कि लॉयल्टी का सही मतलब यह है कि आप अपनी पूरी क्षमता और मेहनत से कार्य करें। आप अपनी सर्विसेज दे रहें है जान देने की जरूरत नहीं है।

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