नवरात्रि क्यों मनायी जाती है? नवरात्रि का महत्व, नवरात्रि के नौ दिन, नवरात्रि की कहानी और नवरात्रि पर 10 अंक क्या हैं?

भारत त्योहारों का देश है। यहाँ पर कई त्यौहार मनाए जाने है और उन प्रमुख त्योहारों में से नवरात्रि सबसे प्रिय है। ये पर्व नौ दिन का पर्व है जिसमे माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना होती है। नवरात्रि साल में दो बार आती है। एक बार गर्मी के मौसम में यानि चैत्र नवरात्रि और दूसरी नवरात्रि शारदीय नवरात्र होते है। शारदीय नवरात्रि में गरबो की धूम होती है। गरबो में माँ के भक्त उनके लिए खुबसूरत चनिया चोली पहनकर दिन रात गरबा करते है।

आपको भी दूसरो की तरह ये जानने की उत्सुकता होगी कि नवरात्रि क्यों मनाई जाती है। आइए जानते है –

नवरात्रि मनाने की पीछे एक और कथा प्रचलित है। श्री राम ने लंका जाने के लिए समुद्र पार करने से पहले माँ चंडी की पूजा करने की और उन्हें प्रसन्न करने की सोची। इसके उन्होंने हवन की तैयारी की। इस हवन में १०८ दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था की। वही रावण भी अमरता पानी के इच्छा से माँ चंडी की आराधना शुरू की। रावन ने अपनी मायावी शक्ति का प्रयोग किया और श्री राम के १०८ कमल में से एक कमल गायब कर दिया। कमल के कम होने से श्री राम की पूजा खंडित हो जाती और माँ चंडी क्रोधित हो जाती, इसलिए श्री राम ने सोचा कि वो अपना एक नेत्र माँ को अर्पण कर देंगे क्योकि सभी लोग उन्हें प्यार से कमलनयन नवकंच लोचन पुकारते थे। श्री राम नी एक तीर उठाया और अपने नेत्र निकालने ही वाले थे कि माँ चंडी प्रकट हुई और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनके विजयी होने का आशीर्वाद दिया।

रावन के पूजन में विघ्न डालने की मंशा से हनुमान जी एक ब्राह्मण बालक का रूप धरके ब्राह्मणों की सेवा करने लगे। उनकी इस सेवा से सभी ब्राह्मण खुश हुए और वरदान मांगने को कहने लगे। हनुमान जी ने प्यार से विनती कि, “प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे हैं, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए। मंत्र में जयादेवी… भूर्तिहरिणी में ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है।“ हनुमान जी के इस कथन को ब्राह्मण समझ नही पाए और उन्हें तथास्तु कहकर वरदान दे दिया। मन्त्र में भूर्तिहरिणी का अर्थ है दुःख हरने वाली और यानी ‘करिणी’ का मतलब होता है दुःख देनी वाली। एक अक्षर के बदलने की वजह से मन्त्र गलत हो गया और माँ चंडी क्रोधित हो गई और उन्होंने रावण को उसके सर्वनाश होने का श्राप दिया।

नवदुर्गा के नाम – Name of Nav Durja Mata

शैलपुत्री – Shailputri
ब्रह्मचारिणी – Maa Brahmacharini
चन्द्रघंटा – Maa Chandraghanta
कुष्मांडा – Maa Kushmanda
स्कंदमाता – Maa Skandamata
कात्यायनी – Maa Katyayani
कालरात्रि – Maa Kalratri
महागौरी – Maa Mahagauri
सिद्धिदात्री – Maa Siddhidatri
नवरात्रि पूजन विधि

नवरात्रि की पूजन से पहले जिस स्थान पर आप माँ की स्थापना करने वाले है उसकी अच्छे से सफाई करे। घर के मंदिर में स्थापना कर रहे है तो मंदिर को अच्छे से साफ़ कर ले।
अब मंदिर में दुर्गा माँ की मूर्ति की स्थापना करे।
माँ को फूलो की माला पहनाए।
अब माँ को सिन्दूर, हल्दी, बेलपत्र, लाल फूल और पीले चावल अर्पण करे।
अब एक बर्तन में साफ़ मिटटी लाकर डाले।
अब इस मिटटी में जौ के बीज बो दे।
अब एक मिटटी का या धातु का कलश ले और उसमे कशेली और सिक्के डाले।
अब कलश के ऊपर आम के पत्ते डाले।
अब कलश को मिटटी की प्लेट से ढके।
अब इस प्लेट में धान या जौ रखे।
अब एक नारियल ले और उसपर लाल कपडा लपेटे और कलश पर रख दे।

अब कलश के नीचे दिया जलाए। एक बात का ख्याल रखे, दिए ने नीचे पीले चावल जरुर रखे।
अब कलश पर रोली लपेटे।
अब पूरे नौ दिन तक कलश को माँ के सामने रहने दे।
अब गंगाजल छिडक दे।
अब एक दिया जगाए जो ९ दिन तक अखंड जलेगा।
अब माँ को फल, मिठाई और घर पर बना व्यंजन अरपर्ण करे।
अब माँ की स्तुति, चालीसा और दुर्गा कवच का पाठ करे।
अब कपूर को पान के पाते में जगाए और दुर्गा माँ की आरती गाए।
आरती के बाद सभी को माँ का प्रसाद बांटे।

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