नवरात्रि के पहले दिन, प्रतिपदा / घटस्थापना क्या होती है और इसकी विधि क्या होती है?

बसंत के समय नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि, वर्ष में दो बार मनाये जाते हैं. बसंत नवरात्रि नये वर्ष तथा नयी फसलों, नए मौसम और जीवन दायिनी शक्ति से प्रेरित है. उस समय हम उस शक्ति की पूजा करते हैं जो विश्व को चला रही है.

शारदीय नवरात्री, को अकाल बोधन से भी जाना जाता है. अकाल यानि असमय..यह असमय पूजन राम के द्वारा शक्ति के आह्वान के लिए किया गया था. जब किसी भी तरह रावण परास्त नही हो रहा था, तब राम ने युद्ध की बागडोर लक्ष्मण के हाथ में दे कर नौ दिन तक देवी का ध्यान किया. शैल पुत्री के रूप से लेकर महागौरी तथा नवां रूप सिद्धिदात्री तक ध्यान में रख कर देवी का आह्वान कर कर शक्ति को आत्मसात किया था. उसके बाद दसवें दिन रावण का वध हुआ.

घटस्थापना के रूप में माँ का अस्तित्व रहता है. सभी प्राकृतिक वस्तुओं को इकठ्ठा करके एक घट में जल रख कर उसके आसपास सजाया जाता है और फिर मन्त्रोंच्चार्ण कर के माँ का आह्वान किया जाता है.और इस तरह घट में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है. यह माना जाता है कि प्राण प्रतिस्था होने के बाद देवी वहां विराजमान रहती हैं. चूंकि शक्ति का कोई रूप नहीं होता, उन्हें ध्यान में रखने के लिए, शक्ति का रूप अस्त्र-शस्त्र से सजी सिंघ्वाहिनी दुर्गा के रूप में मूर्तरूप देकर ध्यान किया जता है.

घट स्थापना की विधि वैसे तो यह है कि एक थाली जैसे पात्र में मिट्टी बिछा कर पहले जौ बोयें तथा बीच में कलश रखने के लिए जगह छोड़ दें. अब कलश पर स्वास्तिक बना कर गले में मौली बांध दें. कलश में जल भरें (गंगा जल हो तो उत्तम है.)और सुपारी, दूरबा घास, पञ्च रत्न, सिक्का आदि डाल दें (मतलब यह कि सांसारिक वस्तु, जो हम उपयोग करते हैं, माँ को भी दे रहे हैं) पांच पत्तों का आम का पल्लव कलश के ऊपर रखें तथा उसके ऊपर अक्षत (साबुत चाव्ल से भरा मिट्टी का छिछला प्याला रखें. उसके ऊपर एक हरा नारियल जिसकी डंठल कटी न हो और रखने के समय आप की तरफ हो(अगर न मिले तो साधारण नारियल रखें जिसकी आँखें आप के सामने हों. ) रखें.

स्वास्तिक और नारियल का मुह अपनी तरफ करते हुए इसे जाऊ वाली थाली के बीच में बिठाएं तथा सामने एक दीपक की ज्योति जलाएं.

शहरों में अब जौ को उगाने की प्रथा नहीं रही अतः उसे छोड़ कर ही घट स्थापना की जाने लगी है.

इसके बाद पूजन करके माँ काह्वन करें तथा कलश में प्राण प्रतिस्थापित करें.

नारियल के तीन गहरे बिंदु.. माँ के त्रिनेत्री रूप को दर्शाते हैं.

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