धोनी और विराट कोहली में अधिक होशियार कौन है?

महेंद्र सिंह धोनी

एक अद्भुत लीडर, एक अच्छा खिलाड़ी और एक अच्छा इंसान| किसी ने नहीं सोचा था कि भारत के छोटे से शहर “रांची” के मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मा एक लड़का अपनी ज़िद के दम पर पूरी दुनिया में छा जाएगा| धोनी एक “क्रिकेट खिलाड़ी” से कहीं बढ़कर हैं, जिसने यह साबित किया है कि अगर खुद पर भरोसा रखा जाए तो पूरी कायनात आपके हक़ में खड़ी हो जाती है|

अपने दिल की आवाज सुनना

धोनी को खुद पर पूरी दुनिया से ज्यादा भरोसा है और वे हमेशा वही करते है, जो उन्हें सही लगता है| यही कारण है कि धोनी ने इतिहास रचा है| बचपन में उनके पिता चाहते थे कि वे खेल-कूद छोड़कर अच्छी नौकरी कर ले, लेकिन उन्होंने अपने दिल की सुनी|

मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण उन्होंने खेल के साथ-साथ 3 वर्ष तक रेलवे में टी.सी. की नौकरी भी की| लेकिन जब उन्हें लगा कि नौकरी की वजह से उनके खेल पर बुरा असर पड़ रहा है तो उन्होंने एक पल में नौकरी छोड़ दी जबकि वे जानते थे कि इस फैसले में परिवार और समाज शायद उनका साथ नहीं देगा|

क्रिकेट फिल्ड पर ऐसे कई निर्णय लेते पाए गए है, जो आम सोच से हट कर है। T-20 वर्ल्ड कप फाइनल के आखिरी ओवर में उन्होंने नए खिलाड़ी जोगिन्दर शर्मा को गेंदबाजी दी| धोनी का खुद पर और अपने खिलाड़ियों पर इतना गहरा भरोसा था कि हार की कगार पर खड़ा भारतीय टीम जादुई तरीके से मैच जीत गई|

धोनी के विश्वास का जादू कई बार दिखा है और जब जब उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी है तब-तब किस्मत ने उनका साथ दिया है|

कभी हार न मानना

खेल की आखरी गेंद तक संघर्ष चालू रखना धोनी का स्वभाव है। इसीलिए धोनी को क्रिकेट में बेस्ट फिनिशर माना जाता है। यह बात उनके जीवन के अन्य पहलुओं के लिए भी उतनी ही सच है। ऐसे कई मौके आये जब परिस्थितियां उन्हें क्रिकेट छोड़ने पर मजबूर कर रही थी। लेकिन वे डट कर अपने प्रयत्न करते रहे।

दबाव में और बेहतर प्रदर्शन करना

परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हो, धोनी हमेशा शांत रहते है और अपने खेल के बारे में सोचते रहते है। खेल की आखिरी गेंद पर ज्यादा रन चाहिए तब कई खिलाडी उत्तेजना और दबाव में अपना विकेट गँवा देते है। लेकिन धोनी एक ऐसे खिलाडी है जिनका खेल इन परिस्थितियों में और भी निखरता है| धोनी ने कई बार आखिर ओवर में 3-4 बाउंड्री लगाकर मैच जिताए हैं|

जिम्मेदारी उठाना

2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में धोनी ऊपर के क्रम पर बैटिंग करने आये। वे कप्तान के तौर पर आसानी से पिछले क्रम पर आकर विरोधी टीम का स्कोर पार करने की जिम्मेदारी किसी और खिलाड़ी पर डाल सकते थे, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी खुद उठायी| उन्होंने कई बार भारत को मैच जिताने के आखिर ओवरों में रन न लेकर स्ट्राइक अपने पास रखी, जबकि वे जानते थे कि अगर उनका निर्णय गलत हुआ तो उन्हें भारी आलोचना का सामना करना पड़ेगा|

यह धोनी का आत्मविश्वास ही है, जो उन्हें पूरी दुनिया के शोर में दिल की आवाज सुनने की हिम्मत देता है|

अपने साथी खिलाडियों के सामने उदाहरण बनना

धोनी उन चुनिन्दा कप्तानों में से है, जो अपनी टीम के सामने खुद एक उदाहरण पेश करते है। हर रोज सबसे पहले मैदान में पहुँच कर जाम कर पसीना बहाना उनके रोज के कार्यो में से एक है। वे खुद के लिए और उनकी कप्तानी में खेलने वाले अन्य खिलाड़ियों के लिए एक सामान नियम बनाते है, जिनका खुद सबसे ज्यादा पालन करते है। उनके कार्य अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते है।

विनम्रता और अन्य लोगों का सम्मान करना

विश्व विजेता टीम के कप्तान और देश के मशहूर सेलीब्रिटी होने के बावजूद धोनी हमेशा ही एक विनम्र और आकर्षक व्यक्तित्व वाले इंसान रहे है। उन्होंने कभी अपने बड़े होने का अभिमान नहीं जताया है। यह धोनी का व्यक्तित्व का ही जादू है कि धोनी की कप्तानी में सचिन, सहवाग और युवराज सीनियर खिलाड़ी खेले और उन्होंने एक मजबूत टीम बनाई जिसने भारत को वर्ल्ड कप जीता दिया|

परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना

धोनी विश्व के सबसे बहुमुखी क्रिकेटरों में से एक है। उन्होंने देश में और देश के बाहर भी सफलता पायी है। अगर वे विकेट कीपिंग में सर्वोत्तम है, तो बेटिंग में भी किसी से कम नहीं। चाहे वे भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे हो या विदेशी खिलाडियों से भरी आई.पी.एल. की टीम का, वे हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेते है।

जब वे कप्तान नहीं थे, तो उनकी बैटिंग करना का तरीका अलग था और वे खुलकर खेलते थे, लेकिन वे जब कप्तान बने तो उन्होंने एक लीडर की तरह जिम्मेदारी निभाते हुए परिस्थितियों के अनुसार बैटिंग की| “बदलाव ही जीवन है”, धोनी ने इस विचार को साकार किया है।

एकाग्रता

चाहे धोनी की प्रशंसा हो रही हो या निंदा, धोनी ने कभी भी इन सब का प्रभाव अपने खेल पर नहीं पड़ने दिया। उनकी एकाग्रता हमेशा अपने खेल पर रही है। यह उनकी एकाग्रता का ही कमाल है कि उन्होंने ऐसी स्थितियों में कई खिलाडियों को इतनी चालाकी और फुर्ती से आउट किया है कि बैट्समेन ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह ऐसा आउट हो जाएगा|

उन्होंने अपनी निजी जिंदगी में हो रही घटनाओं को अपने खेल जीवन से अलग रखा। अपने आसपास के विकर्षण से खुद को अलग रखना, किसी भी सफल कप्तान का एक महत्वपूर्ण लक्षण है।

अपनी निष्फलता से सीखना

धोनी ने अपने जीवन में कई बार असफलताओं का सामना किया, लेकिन हर बार उन्होंने असफलता को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। वे मानते है कि हर निष्फलता कुछ नया सिखने का मौका देती है।

अपने शुरूआती करियर में अंडर 19 टीम में मौक़ा न पाने की निष्फलता ने उन्हें निराश नहीं किया। धोनी ने करीब 18 वर्ष की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलना शुरू किया था और उन्हें 23 वर्ष की उम्र तक इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह नहीं मिली| ऐसी परिस्थितियों में कोई भी हार मान सकता है, लेकिन इन्ही असफलताओं ने धोनी को मजबूत बनाया|

कड़ी मेहनत करना

मेहनत का कोई पर्याय नहीं है। धोनी अपने खेल को सुधरने के लिए घंटो तक मैदान में पसीना बहाते थे। उन्होंने 3 वर्ष तक क्रिकेट खेलने के साथ-साथ रेलवे में टी.सी. की नौकरी भी की। आज करीब 36 वर्ष की उम्र भी धोनी टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों से भी तेज भागते है और उन्हें रन आउट करना किसी भी टीम के लिए लगभग नामुनकिन है| वे इतनी फुर्ती से विकेट-कीपिंग करते है कि कभी कभी तो बैट्समैन को पता तक नहीं चलता कि वह आउट कब हो गए | इस महान खिलाड़ी ने कभी भी आसान राह नहीं चुनी|

विराट कोहली

1. विराट कोहली को बचपन में उनके कोच अजीत चौधरी ने एक निकनेम दिया था और वह निकनेम चीकू था।

2. अभी भारतीय खिलाड़ियों में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड विराट के नाम है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैच में 52 गेंदों पर 100 रन बनाए थे।

3. विराट कोहली टैटू के शौकीन हैं। उन्होंने चार बार टैटू बनवाएं हैं। समुराई यौद्धा वाला टैटू उन्हें सबसे अधिक पसंद है।

4. 2006 में रणजी ट्रॉफी के एक खास मैच में कर्नाटक के विरुद्ध खेलते वक्त उनके पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया था। फिर भी उन्होंने टीम को नहीं छोड़ा और दिल्ली की तरफ से अपना रणजी पदार्पण किया।

5. कोहली अपने फैशन सेंस के लिए भी जाने जाते हैं। उनका नाम 10 बेहतरीन कपड़े पहनने वाले आदमियों में शामिल हैं। इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम भी शामिल है।

6. अभी वे एक दर्जन से भी ज्यादा ब्रांड्स के लिए प्रचार करते हैं। माना जाता है कि वह खास ‘विसल्स’ क्लब जिसमें 100 रुपए से ज्यादा के ब्रांड्स का प्रचार करने वाले खिलाडी शामिल हैं, का भी हिस्सा हैं।

7. विराट की लड़कियों में लोकप्रियता गजब की है। उन्हें खून से लिखे प्रेम पत्र मिलना बहुत सामान्य बात है।

8. विराट कोहली कम उम्र में करिश्मा कपूर को पसंद करते थे।

9. विराट को स्वादिष्ट खाना पसंद है जब वे दुनिया में कहीं भी यात्रा करते हैं। घर होने पर उन्हें अपनी मम्मी के हाथों की बनी मटन बिरयानी और खीर पसंद है।

10. 2013 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों से उन्हें अर्जुन अवॉर्ड प्राप्त हुआ था।

11. सचिन तेंदुलकर और सुरेश रैना के अलावा विराट ही अकेले ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने अपने 22वें जन्मदिन से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना शतक पूरा कर लिया था।

12. 23 साल की उम्र में विराट कोहली ने ICC का क्रिकेटर ऑफ द ईयर का खिताब 2012 में जीता था।

13. विराट कोहली अकेले टीम इंडिया के एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने फिल ह्यूजेस के अंतिम संस्कार में भाग लिया था।

> 14. विराट कोहली अपने नाम से गरीब बच्चों के लिए एक संस्था चलाते हैं। जिसका नाम विराट कोहली फाउंडेशन है।

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