धनतेरस क्यों मनाया जाता है? और इसे महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले होता है। कुछ लोगो को पता तो है कि धनतेरस पर सोना, चांदी, कोई नई चीज, बर्तन खरीदना चाहिए पर क्यों खरीदना चाहिए, ये बहुत कम लोग जानते है। आइए आज हम आपको बताए है कि धनतेरस पर क्यों खरीदते हैं सोना और बर्तन। इतना ही लोग नए काम की शुरवात भी इस दिन करते है। कुछ लोग इस दिन जुआ खेलना शुभ मानते है।

इस दिन सोना और बर्तन खरीदने के पीछे एक पौराणिक कथा है। ऐसा माना जाता है एक राजा था हिम। उसके बेटे को ये श्राप मिला हुआ था कि वो अपनी शादी के चौथे दिन मृत्यु को प्राप्त होगा। शादी के बाद जब ये बात पत्नी को पता चली तो उसने अपने पति की जान बचाने के लिए एक युक्ति सोची। उसने अपने पति से चौथे दिन पूरी रात दिन जगे रहने की प्राथना की। अपने पति को सोने से रोकने के लिए वो दिन रात कहानियां सुनती रही और गीत गाती रही। इतना ही नही उन्होंने अपने दरवाजे पर सोना चाह्दी के अभुष्ण और कई कीमती चीजे रखी।

उसने अपने के आस पास बहुत सारे दिए भी जगाए। उस दिन यमराज सांप का रूप लेकर हिम के बेटे के प्राण लेने आए। सांप रूपी यम दिए और सोने चांदी की चमक और रौशनी से अंधे हो गए। इस वजह से वो घर में अन्दर नही आ पाए। वो रात भर अभुशानो पर बैठे रहे और राजकुमारी के गीत सुनते रहे। जब सुबह हुई तो यमराज हिम के बेटे के प्राण लिए बिना ही चले गए क्योकि मृत्यु का समय बीत गया था। इस तरह राजकुमारी ने अपने पति के प्राण बचा लिए।

इस दिन के पीछे की कहानी तो अपने जान ली। आइए अब जाने है धनतेरस पूजन विधि। धनतेरस की पूजा पूरी श्रधा से करने से मनोकामना पूरी होती है।

धनतेरस पूजन विधि –

सबसे पहले मंदिर साफ़ करे और वहां पर भगवान धन्वंतरि और मिटटी से बने हाथी की स्थापना करे।
अब ताम्बे या चांदी की आचमनी ले और उससे जल आचमन करे।
अब गणेश जी का आह्वान करे और पूजा करे।
अब अपने हाथ में फुल और अक्षत ले और धन्वंतरि भगवान का ध्यान करे।
अब ये मन्त्र बोले –

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान

दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः

पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो

धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः

ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः

ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि।।।

अब फूल चढ़ाए और जल आचमन करे।

अब जल के छींटे तीन बार दे और ये मन्त्र बोले

पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि।

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