दाई या बाई कौन सी सूंड वाला गणपति पूजनीय होता है? जानिए

गणपति की प्रतिमा को लेकर एक जिज्ञासा हमेशा रहती है कि उनकी सूंड किस दिशा में होना चाहिए। कहीं दाईं ओर तो कहीं बाईं ओर सूंड वाले गजानन दिखलाई देते हैं।

दोनों ही तरह के सूंड वाले गजानन शुभ ही है,और पूजनीय है, बस इनके पूजा करने का उद्देश्य पृथक पृथक होता है।

जब सूंड दाईं ओर घूमी होती है, तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है।

बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति को इड़ा नाड़ी और चंद्रमा से प्रभावित माना गया है। ऐसी मूर्ति की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली आदि के लिए।

माना जाता है कि बाईं ओर की सूंड किए गणपति हमेशा ही सकारात्मक नतीजे देते हैं। घर में पूजा के लिए बाईं ओर सूंड किए हुए गणेश जी उत्तम है।

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