तांबे के बर्तन का सुबह उठकर पानी पीने से क्या कुछ फायदे हैं?

आयुर्वेदिक ग्रंथों में पीने के पानी के लिए तांबे के बर्तन के उपयोग का उल्लेख है। उनका उद्देश्य संभवतः पीने के पानी को लंबे समय तक पिनेयोग्य रखना रहा होगा लेकिन अभी इसके और भी फायदे सामने आ रहे है l

तांबे के बर्तन में पानी जमा करने से प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रक्रिया होती है। यह पानी में मौजूद शरीर के लिए हानिकारक सूक्ष्मजीवों, मोल्ड्स, कवक, शैवाल और बैक्टीरिया को मार सकता है और पानी को पीने के लिए पूरी तरह से फिट बनाता है।

इसके अलावा, तांबे के बर्तन में रात भर या कम से कम चार घंटे तक संग्रहीत पानी में ऑलिगोडायनामिक प्रभाव नामक प्रक्रिया के माध्यम से तांबा अपने कुछ आयनों को छोड़ता है ।

कॉपर एक आवश्यक ट्रेस खनिजद्रव्य है जो मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

इसमें रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-कार्सिनोजेनिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं। यह हीमोग्लोबिन के निर्माण के साथ-साथ कोशिका पुनर्जनन में सहायता करता है I

यह विषाक्त पदार्थों को बेअसर करने में भी मदत करता है।कुछ पोषण तत्वों के विपरीत, शरीर तांबे को संश्लेषित नहीं कर सकता है, इसलिए आपको इसे आहार स्रोतों से प्राप्त करने की आवश्यकता है l

तांबे के बर्तन में रखा गया 2 से 3 गिलास पानी पीना शरीर को पर्याप्त तांबे की आपूर्ति करने का एक और आसान तरीका है।

आयुर्वेद के अनुसार, सुबह खाली पेट सबसे पहले तांबे का पानी पीने से तीनों दोषों (कप, वात और पित्त) को संतुलित करने में मदद मिलती है। यह विभिन्न अंगों और कई चयापचय प्रक्रियाओं के समुचित कार्य को भी सुनिश्चित करता है।

१, पाचन तंत्र को बनाए बेहतर-कॉपर हानिकारक बैक्टीरिया को मारता हैं और पेट के भीतर की सूजन कम करते हैं, जिससे यह अल्सर, अपच और संक्रमण के लिए एक बढ़िया उपाय है। कॉपर पेट को डिटॉक्स और शुद्ध करने में भी मदत करता है, लीवर और किडनी के काम को नियंत्रित करता है और शरीर से मल के उचित उन्मूलन में सहायक है और भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण सुनिश्चित करता है।

२. वजन कम करने में सहायक-तेजी से वजन कम करने के लिए नियमित रूप से तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की कोशिश करें। पाचन तंत्र को ठीक करने के अलावा, तांबा शरीर को फैट्स के ब्रेकडाउन में भी मदत करता है l इससे शरीर आवश्यक फैट के अलावा अतिरिक्त फैट्स को बाहर निकालता है।

३. घाव को तेजी से ठीक करने में सहायक -अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण, तांबा घावों को जल्दी भरने में मदत करता है। इसके अलावा, तांबा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और नई कोशिकाओं के उत्पादन में सहायता करने के लिए भी जाना जाता है। यह शरीर के भीतर घाव, खासकर पेट के, भरने में भी लाभदायक है l

४. बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करे-बढ़ती उम्र के कारण चेहरे पर दिखनेवाली महीन रेखाओं को कम करने के लिए तांबा एक प्राकृतिक उपचार है। यह अपने एंटी-ऑक्सीडेंट गुण के कारण फ्री रेडिकल्स की वजह से होनेवाली त्वचा की क्षति को कम करता है और उसे युवा बनाये रखने में मदत करता है I

५. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक-तांबा हृदय रोग की जोखिम कम करने में मदत करता है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, तांबे को रक्तचाप और हृदय गती नियंत्रण करने, खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में लाभदायक पाया गया है।

६.संक्रमण से बचाता है-तांबा अपने ऑलिगोडायनामिक (बैक्टीरिया पर धातुओं के स्टरलाइज़िंग एक्शन) प्रभाव के कारण बैक्टीरिया को बहुत प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकता है। यह विशेष रूप से E.coli और S.aureus के खिलाफ प्रभावी है, जो मानव शरीर में गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं l

७. थायरॉयड ग्रंथि के काम को नियंत्रित करता है- स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि थायराइड के मरीजों में आमतौर पर तांबे का स्तर कम होता है। जबकि यह आमतौर पर हाइपरथायरायडिज्म (अत्यधिक थायराइड हार्मोन) वाले लोगों में देखा जाता है, जो हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन के निम्न स्तर) वाले लोग भी इस कमी से पीड़ित हो सकते हैं l तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीना इस कमी को दूर कर सकता है l

८.त्वचा के स्वास्थ्य और मेलेनिन उत्पादन को बढ़ाता हैकॉपर शरीर में मेलेनिन (एक वर्णक जो आंखों, बालों और त्वचा के रंग को कम करता है) के उत्पादन में मुख्य घटक है। इसके अलावा तांबा नई कोशिकाओं के उत्पादन में सहायक होता हैं जो त्वचा की सबसे ऊपरी परतों को फिर से भर कर स्वास्थ्यपूर्ण और दमकती त्वचा पाने में मदत करता है।

९. एनीमिया को रोकता हैशरीर में होनेवाली अधिकांश प्रक्रियाओं में तांबे की आवश्यकता होती है। कोशिका निर्माण से लेकर लोहे के अवशोषण में सहायता करने तक, तांबा शरीर के अनेक कार्यों के लिए एक आवश्यक खनिज है।

२०१२ में शोधकर्ताओं ने पानी के रोगाणुरोधी गुणों का पता लगाने के लिए कई परीक्षणों का आयोजन किया। कॉलरा बैक्टीरिया के कल्चर को १६ घंटे से अधिक समय तक तांबे के बर्तन में रखे पानी में मिलाया गया था।

कई और परीक्षणों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि तांबे में एक रोगाणुरोधी गुण होता है, क्योंकि वे तांबे के बर्तन में रखे पानी से कॉलरा बैक्टीरिया के किसी भी नमूने को निकालने में सक्षम नहीं थे, जबकि पानी में तांबे की मात्रा WHO के मानकों के अनुसार तय सीमा के भीतर थी।

जून २०१६ में, प्राकृतिक रासायनिक जीवविज्ञान ने एक अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें साबित हुआ कि मानव शरीर में फैट बर्न करने में तांबे की महत्वपूर्ण भूमिका है।

२०१७ में, अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने हानिकारक रोगाणुओं को मारने के गुणोंसे युक्त एकमात्र प्राकृतिक धातु के रूप में कॉपर को रजिस्टर किया।

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