डॉक्टरों द्वारा लगाया जाने वाला ‘टांका’ में कौन सा धागा प्रयोग में लिया जाता है?

शल्यचिकित्सक टांका (surgical suture) एक चिकित्सक उपचार होता है जिसमें एक सुई में आंततंतु या अन्य किसी सामग्री का बना धागा (प्राकृतिक) डालकर जीवों के ऊतकों को एक-साथ कसकर बाँधा जाता है। इन टांकों का ध्येय होता है कि वह ऊतक पाकृतिक प्रक्रियायों से धीरे-धीरे जुड़ सकें। इन टांकों के अन्त में अक्सर एक गाँठ बाँध दी जाती

आंततंतु, जिसे अक्सर कैटगट (catgut) भी कहते है, ऐसे प्राकृतिकरेशे होते हैं जो प्राणियों की आँतों मे मिलने वाले रेशों से बनते हैं। इन्हें अक्सर भेड़ों व बकरियों की आँतों से बनाया जाता है, हालांकि सूअरों, घोड़ों, गधों व खच्चरों की आँतों का प्रयोग भी पाया जाता है, और यह प्रदूषण भी नहीं फैलता। आंततंतु द्वारा बने रेशे का प्रयोग मुख्यतः भीतरी चीर-फाड़ को टांकने के लिए किया जाता है ताकि कुछ समय पश्चात् यह खुद ब खुद गल जाए।

दो तरह का होता है ऑपरेशन में उपयोग होने वाला धागा

ऑपरेशन में दो तरह के धागे का उपयोग टांके लगाने के लिए किया जाता है। मसलन शरीर के अंदर ऑपरेशन के बाद टांके लगाए जाते हैं तो वहां पर ऐसे धागे का उपयोग किया जाता है जो निश्चित समय के बाद अपने आप गल जाता है। जिससे मरीज को परेशानी नहीं होती, लेकिन मरीजों के शरीर के बाहरी हिस्से में जिस धागे से टांके लगाए जाते हैं, टांके में उपयोग होने वाला धागा अपने आप नहीं गलता। बल्कि निश्चित समय के बाद इन्हें काटा जाता है।

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