ट्रेडिंग करते समय किस बात का ध्यान देना चाहिए ? जानिए

भारत अक्सर लोग शेयर मार्केट की ट्रेडिंग से दूर रहने की सलाह देते मिल जाएंगे, क्योंकि उन्हें जोखिम का डर रहता है। हालांकि अगर ट्रेडिंग बेल्स के सह संस्थापक एंव सीईओ अमित गुप्ता की सलाह को ध्यान रखकर ट्रेडिंग करेंगे, तो जोखिम की संभावना कम हो जाएगी। हालांकि गुप्ता का मानना है कि अगर सतर्क रहकर ट्रेडिंग नहीं की गई, तो आप कई अच्छे मौकों को खो देंगे।

ट्रेडिंग को गंभीरता से करना चाहिए, जितनी गंभीरता से आप किसी अन्य पेशे में काम करते हैं। मैं हमेशा से अपने दोस्तों को सलाह देता हूं कि ट्रेडिंग में भावी जोखिम को ध्यान में रखें साथ ही दीर्घ कालिक निवेश के लिए सोच-समझ का फैसला लें।

  1. पहले ही दिन करोड़पति बनने की कोशिस न करें
  2. पूरा पैसा का एक शेयर ही मत खरीदें
  3. कुकुरमुत्ते की तरह ट्रेडिंग न करें
  4. बिना सोचे समझे सट्टे या जुए की तरह ट्रेडिंग न करें
  5. ज़्यादा फायदे के पीछे न दौड़ें
  6. जो नीचे जाता है, वह हमेशा ऊपर उठे, ऐसा ज़रुरी नहीं
  7. ऑनलाइन ट्रेडिंग आसान
  8. तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल करते समय सिर्फ एक या दो संकेत पर ध्यान दे

ट्रेडिंग किसी भी अन्य पेशे की तरह है, जिसके लिए अभ्यास और समर्पण की ज़रूरत होती है। अगर आप इस पेशे के नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आपको नुकसान हो सकता है। मैंने पिछले सालों के दौरान अपने अनुभव से यही सीखा है कि अगर आप भावनाओं के बजाए समर्पण का इस्तेमाल करें तो आप इस पेशे में सफल हो सकते हैं। ट्रेडिंग में आपको जोखिम उठाना पड़ता है और इसी का फायदा आपको मिलता है। हालांकि कुछ नियमों, बाज़ार की खबरों और सुझावों तथा अपनी समझ का इस्तेमाल करते हुए इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

ज़्यादा फायदे के पीछे न दौड़ें

ज़्यादा फायदे का अर्थ ज़्यादा मुनाफे से नहीं है। अगर ऐसा होता तो ब्रोकर- ऑटो स्क्वेयर ऑफ या ब्याज या मार्जिन की कमी जैसे नियम नहीं बनाते? ज़्यादा फायदे का अर्थ ज़्यादा मुनाफे से है अगर बाज़ार आपके पक्ष में है, हालांकि अगर इसका उल्टा हो जाए तो आपको ज़्यादा नुकसान भी हो सकता है। यह फायदा दो धारी तलवार है, जो अनजाने में उपभोक्ता को नुकसान पहुंचा सकती है। ट्रेडिंग बेल्स में हम अपने उपभोक्ताओं को सलाह देते हैं कि इस पूरे फायदे का इस्तेमाल न करें, इसके बजाए उन सर्वश्रेष्ठ कंपनियों को चुनने के लिए पैसा और धन लगाएं जिनकी नींव मजबूत है और जहां दीर्घकालिक निवेश कर उन्हें खुशी महसूस होगी।

जो नीचे जाता है, वह हमेशा ऊपर उठे, ऐसा ज़रुरी नहीं

केन्स का कहना है कि ‘आप जितने समय तक सॉल्वेंट रहते हैं, बाज़ार उससे ज़्यादा लम्बे समय तक तर्कहीन रह सकता है’। कभी भी यह सोच कर ट्रेडिंग न करें कि क्रैश के बाद बाज़ार उठेगा, इससे हो सकता है कि आपको बहुत लम्बा इंतजार करना पड़े और बाद में प्रतिकूल स्तर तक पहुंच कर बाहर आना पड़े। गिरावट के बाद बाज़ार में उछाल आ सकता है लेकिन कई बार इसमें महीनों या सालों लग जाते हैं, जैसा कि डीजेआईए के मामले में हुआ, जहां 1929 से पहले के क्रैश को उबरने में 22 साल लग गए। इसलिए अल्पकालिक ट्रेडिंग करते समय हमेशा बाज़ार के रुझानों पर ध्यान दें और उन कंपनियों में दीर्घकालिक निवेश करें जिनकी नींव मजबूत है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग आसान

कई ट्रेडर्स ट्रेडिंग से पहले, दूसरे आश्वासन की उम्मीद में डीलर को फोन करते हैं या ट्रेडिंग के लिए व्यक्तिगत रुप से ब्रोकर से मिलते हैं। वास्तव में ऐसा हो सकता है कि ब्रोकर आपसे कमाई की उम्मीद में आपको दीर्घकालिक निवेश की सलाह न दे। अपने खुद के रिसर्च पर भरोसा करें। आप खुद ऑनलाइन ट्रेडिंग कर आप अपना पैसा और समय दोनों बचा सकते हैं। भारत में ऑनलाइन ट्रेडर्स की संख्या बढ़ रही है लेकिन इस दृष्टि से विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष आने के लिए अभी हमें बहुत लम्बी दूरी तय करनी है। सरकार की ओर से डिजिटल इंडिया, इंटरनेट की पहुंच को बढ़ावा देने से ऑनलाइन ट्रेडर्स को प्रोत्साहन मिल रहा है और इस क्षेत्र में नई तेज़ी आई है।

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