जीवन के 3 चरण कैसे सफलतापूर्वक पार करें

एक फिल्म का मशहूर गाना है पहला घंटा बचपन दूसरा जवानी और तीसरा बुढ़ापा बस इन तीन चरणों का है जीवन उसके बाद आप इस दुनिया से उसी प्रकार चले जाएंगे जैसे किराए दार—- मकान मालिक का घर छोड़ कर चला जाता है जो भी व्यक्तिइन चरणों को सफलता पूर्वक पूरा करता है वही असल में जीवन— का भरपूर आनंद लेता है.

बचपन:
बचपन में व्यक्ति के पास भर पूर ऊर्जा होती है और समय की– कोई कमी नहीं होती है इसलिए कहा जाता है अगर बचपन—– संभालना है तो बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना चाहिए अगर बचपन में ऊर्जा सही दिशा में लग गई तब बच्चों का—— भविष्य सही दिशा में चला जाता है.

जवानी:
जवानी में ऊर्जा और संसाधनों की कमी नहीं होती परंतु समय– की कमी रहती है इसलिए जवानी मै समय सबसे बहुमूल्य होता है अगर व्यक्ति अपनी जवानी के समय को व्यवस्थित करना—- सीख जाए तो उसका यह चरण खुशहाल हो जाता है.

बुढ़ापा:
बुढ़ापे में समय और संसाधन की कोई कमी नहीं होती मगर—– शरीर की ऊर्जा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है बुढ़ापे की दहलीज पर कदम रखते ही व्यक्ति को सांसारिक चीजों धीरे-धीरे दूरी—- बनाना प्रारंभ कर देना चाहिए अगर आप ऐसा नहीं करते तो हो सकता है बुढ़ापे का एक लंबा समय आपको बीमारी में गुजारना पड़ सकता है.

जीवन के तीनों चरणों को व्यक्ति पार करके ठीक उसी प्रकार— चला जाता है जैसा तोता पिंजरे से बाहर निकल जाता है व्यक्ति को स्वयं का शरीर वास्तव में उस की आत्मा का कैद खाना है— जिस में वह अपनी इच्छाओं के वशीभूत होकर कर्म करतारहता है.

व्यक्ति को अपने जीवन का भर पूर आनंद लेना चाहिए क्योंकि- एक बात सत्य है आप का जो जीवन निकल गया है वह कभी–कभी वापस नहीं आएगा अब आगे भी जाना है आगे जीवन के- नए आनंद और चुनौतियां आप का इंतजार कर रही है इसलिए- हर क्षण में आनंद की तलाश जारी रखें.

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