जीवन के अंतिम सत्य के बारे मे जानने के लिए और साधु और एक व्यक्ति की रोचक कहानी

यदि दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति यह बात समझ ले उसे एक दिन मरना है। उसके जीवन का अटल सत्य मत्यु है। वह जो भी सांसारिक वस्तुएं जोड़ रहा है। मृत्यु के बाद वह सभी सांसारिक वस्तुएं इस पृथ्वी पर ही रह जाएंगी। मृत्यु के बाद जो कर्म उसने किए हैं बस वही उस व्यक्ति के साथ में जाएंगे।

जो लोग इस बात को समझ लेते हैं। वे व्यक्ति सदैव अच्छे कार्य करते हैं। आइए हम आपको एक संत की कहानी सुनाते हैं जिसमें एक संत ने एक व्यक्ति को कैसे बताया कि जीवन का अंतिम सत्य में मत्यु है।

बहुत वर्षों पहले माधव नगर नाम का एक नगर था। जिसके बाहर एक साधु अपनी कुटिया बनाकर रहते थे। साधु की कुटिया नगर के बाहर थी। जब पथिक उनसे बस्ती का रास्ता पूछते तो साधु अपनी उंगली से इशारा करके उन पाथिकों को मार्ग बता देते थे।

परंतु जब भूले भटके राही उस स्थान पर पहुंचते तो वह एक श्मशान घाट पर पहुंच जाते थे। जब राहगीर श्मशान घाट पर पहुंचते तो हमने उस साधु पर बहुत गुस्सा आता था। वह साधु को अपशब्द कहते और अपना मार्ग ढूंढने लग जाते थे।

एक दिन महेश नाम का एक यात्री साधु के पास पहुंचा। पानी पीने के बाद उसने भी साधु से बस्ती का रास्ता पूछा। साधु ने उसे भी इशारा कर दिया। महेश भी श्मशान घाट पहुंच गया तो उसे बहुत गुस्सा आया। उसने साधु को सबक सिखाने का निश्चय किया।

वह साधु की कुटिया में पुनः पहुंचा। उसने साधु को अपशब्द कहे। साधु उसकी बात चुपचाप सुनते रहे। जब महेश साधु को अपशब्द कहते कहते थक गया तो साधु ने उसकी तरफ पानी का गिलास बढा दिया। जब उसने साधु की उदारता को देखा तो हाथ जोड़कर बोला आपने मुझे गलत रास्ता क्यों बताया।

साधु ने मुस्कुराते हुए महेश से कहा कि तुम जिसे बस्ती कहते हो। उस स्थान पर रोज किसी ना किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है अर्थात किसी ना किसी व्यक्ति का घर उजड़ जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु तो निश्चित है। इस स्थान पर लोगों का आना जाना लगा रहता है।

साधु ने महेश से कहा कि लेकिन जो व्यक्ति एक बार श्मशान घाट आता है वह यहीं पर बस कर रह जाता है। क्योंकि जीवन के अंतिम पड़ाव मत्यु है। इसलिए मेरे अनुसार यही बस्ती है। मैं लोगों को यही संदेश देता हूं कि 1 दिन सभी को मरना है। इसलिए सदैव अच्छे कर्म करना चाहिए।1 दिन इस श्मशान घाट में आकर सभी को बसना है।

जब महेश ने संत की बात सुनी तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने संत से क्षमा याचना की और कहा कि आज मुझे जीवन के सत्य का एहसास हुआ है। इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि 1 दिन हमें अवश्य मरना है इसलिए हमें जीवन में अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।

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