जिंदगी में एक बार जरूर करें महबूब नगर की यात्रा

शानदार वास्तुकला और अलंकृत इमारतों से समृद्ध महबूबनगर सातवाहन वंश और चालुक्य वंश का केंद्र रहा है। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और स्थापत्य विरासत के साथ महबूबनगर और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में प्राचीन संस्कृति और विरासत के कुछ बेहतरीन उदाहरण मौजूद हैं।

सांस्‍कृतिक और वास्‍तुकला से समृद्ध महमूदनगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्राचीन संस्कृति और विरासत के कुछ बेहतरीन उदाहरण हैं।पूरा शहर इतिहास की कथाओं से सराबोर है। तेलंगाना के महबूबनगर में खूबसूरत जगहों की कोई कमी नहीं है और अपनी अगली यात्रा के लिए आप इस शहर में घूमने आ सकते हैं। तो चलिए जानते हैं महबूबनगर और इसके दर्शनीय एवं पर्यटन स्‍थलों के बारे में।

महबूबनगर ऐतिहासिक ताना-बाना जहां पर आप राजा-महाराजाओं के समय की झलक देख सकते हैं।

कैसे पहुंचे महमूदनगर

वायु मार्ग द्वारा:महबूबनगर पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद में स्थित है। राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा इस ऐतिहासिक शहर से लगभग 92 किमी दूर है।

रेल मार्ग द्वारा: यहां पर महबूबनगर रेलवे जंक्‍शन स्थित है। देश के अन्‍य हिस्‍सों से इस स्‍टेशन पर नियमित ट्रेनें आती हैं।

सड़क मार्ग से: महबूबनगर शहर कोई बस जंक्शन नहीं है। निकटतम बस टर्मिनल आंध्र प्रदेश शहर से 45 किमी की दूरी पर वानपरथी में स्थित है।

महबूबनगर आने का सही समय:महबूबनगर आने का सबसे सही समय ठंड के मौसम में रहता है। दिसंबर से फरवरी तक यहां का मौसम सुहावना और ठंडा रहता है और इस दौरान यहां का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से30 डिग्री सेल्सियस रहता है। आइए अब जानते हैं महबूहनगर के दर्शनीय स्‍थलों के बारे में।

फराहाबाद

प्रकृति प्रेमियों और शांति और किसी सुकुन भरी जगह की तलाश कर रहे लोगों के लिए फराहाबाद बेहतरीन जगह है। पूर्वी घाट में नल्‍लामाला पहाडियों के घने जंगलों से घिरी इस जगह पर पर्यटकों की भीड़ काफी कम रहती है इसलिए आप यहां पर कुछ समय शांति और सुकुन के साथ बिता सकते हैं। फराहाबाद में आप ट्रैकिंग और खूबसूरत सनसैट के दृश्‍य का आनंद भी उठा सकते हैं। महबूबनगर आने पर आपको इस जगह को जरूर देखना चाहिए।

पिल्ला मरी

पिल्ला मरी एक सदियों पुराना विस्तृत वृक्ष है, जिसकी शाखाएँ महबूबनगर में 3 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं। माना जाता है कि 800 साल पुराना ये बरगद का पेड़ अपनी छाया में लगभग 1000 लोगों को आश्रय दे सकता है। प्रकृति और अपनी अद्भुत क्षमता से यह प्राचीन वृक्ष हर किसी को आश्‍चर्यचकित कर देता है। महबूबनगर आने पर इस पेड़ को देखे बिना आप वापिस कैसे लौट सकते हैं।

गड़वाल

कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित गडवाल में सातवाहन वंश और चालुक्य वंश के प्राचीन क्षेत्रीय नियमों का एक लंबा प्राचीन इतिहास मौजूद है। पूर्व में विद्वादगडवाल के रूप में जाना जाता है। गडवाल उत्तम चेन्नाकेश्वरालयम मंदिर और अभेद्य गडवाल किले के लिए मशहूर है। इस किले का निर्माण 17 वीं शताब्दी में पेडा सोमा भूपालुडु द्वारा करवाया गया था।

अलमपुर

महबूबनगर का जिला कई शानदार स्थापत्य कला और धार्मिक स्थलों से भरा हुआ है। अलमपुर में नवब्रह्म मंदिर और प्रसिद्ध जोगुलम्बा मंदिर जैसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। ये मंदिर 7वीं से 8वीं शताब्दी में बनवाया गया था और यहां तुंगभद्रा नदी के तट पर बने कुल नौ मंदिर हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्तियां स्‍थापित हैं जिनमें उनके कुल 9 अलग-अलग अवतार दर्शाए गए हैं। इस शानदार ऐतिहासिक वास्तुकला के अब बस अवशेष ही बचे हैं जिनके आप दर्शन कर सकते हैं।

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