जानिए रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ था?

हम जानते हैं कि रावण जितना शक्तिशाली था उतना ही अहंकारी भी था इसके बाबजूद रावण एक परम शिव भक्त ,उद्भट राजनीतिज्ञ , महापराक्रमी योद्धा , अत्यन्त बलशाली , शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित, महाज्ञानी और त्रिलोक विजेता था। जिसके बारे में स्वयं श्री राम ने कहा है, इस जैसा विद्वान न आज तक इस धरती पर पैदा हुआ है और न ही कभी होगा |

रावण को वरदान प्राप्‍त था क‍ि उसे देवता भी नहीं मार सकते थे। इस वरदान के अहंकार में आकर एक द‍िन रावण ने सोचा क‍ि मैं यमराज को बंदी बना लूं।

बस इसी मद में चूर होकर एक बार वह यमलोक पहुंच गया। रावण और यमराज के बीच घोर युद्ध हुआ। रावण इस युद्ध में रक्‍तरंज‍ित हो चुका था क‍ि तभी यमराज ने रावण को दंड देने के ल‍िए कालदंड उठाया क‍ि ब्रह्मदेव उपस्थित हुए। उन्‍होंने रावण को द‍िये गए अपने वरदान के बारे में यम देव को बताया कि उसकी मृत्यु किसी देवता के हाथों नहीं लिखी है।

इसके बाद यमराज ने अपना कालदंड वापस ल‍िया। रावण ने सोचा क‍ि यह व‍िजय उसे उसकी शक्तियों के कारण म‍िली। यही वह घटना थी ज‍िसके बाद वह स्‍वयं को कालविजयी समझने लगा।

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