जानिए कौन सिखाता हैं इंडिया के खिलाड़ियों को इतनी जल्दी “अंग्रेजी बोलना जिसे वह बोल पाते है फटाफट अंग्रेजी

इंडियन क्रिकेट” टीम में कई ऐसे खिलाड़ी होते हैं जिन्हें ठीक से इंग्लिश बोलना नहीं आती है। लेकिन कुछ समय के बाद आप उन खिलाड़ियों को फर्राटेदार इंग्लिश बोलते हुए सुन पाते हैं। जैसे न्यूजीलैंड में जब मोहम्मद शमी को अंग्रेजी बोलते हुए सुना गया तो लोग हैरान रह गए क्योंकि शमी ऐसे भारतीय क्रिकेटर माने जाते हैं, जिन्हें इंग्लिश बोलने में काफी परेशानी होती है, लेकिन अब वह इंग्लिश को काफी बेहतरीन तरीके से बोल पाते हैं।

लेकिन दोस्तों क्या आपने कभी यह सोचा है कि जिन भारतीय खिलाड़ियों को ठीक से इंग्लिश बोलना नहीं आती है, उन्हें इंग्लिश कौन सिखाता है और वह कैसे इतनी जल्दी फराटेदार इंग्लिश बोलने लगते हैं। टीम इंडिया में चाहे विराट कोहली हो या फिर चेतेश्वर पुजारा हो या मोहम्मद शमी यह सभी खिलाड़ी फराटेदार इंग्लिश में मीडिया के सवालों का जवाब देते हैं।

टीम इंडिया में खिलाड़ी अक्सर छोटे कस्बों और शहरों या फिर मामूली बैकग्राउंड से आते हैं और यह खिलाड़ी ऐसे घरों से होते हैं जहां पर इंग्लिश बोलने का सवाल ही नहीं उठता है। और इंग्लिश बोलना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है, लेकिन भारतीय टीम में आते ही यह लोग फराटे दार इंग्लिश बोलने लगते हैं।

आपको बता दें कि भारत में “बीसीसीआई” इस बात पर खास ध्यान दे रहा है। और वह सभी ऐसे क्रिकेटरों के लिए “पर्सनैलिटी डेवलपमेंट” और “इंग्लिश स्पीकिंग” के सेशन आयोजित करवाता है।उन्हें इसके लिए दौरों में भी कोच उपलब्ध कराए जाते हैं और साथ ही फोन के जरिए भी इंग्लिश स्पीकिंग सुधारने में मदद की जाती है। दोस्तों बीसीसीआई इस बात का ध्यान रखते हैं कि टीम इंडिया में सिलेक्ट होने वाले सभी क्रिकेटर अच्छी तरह से इंग्लिश बोल सके।

टीम में जिन क्रिकेटरों का सलेक्शन होता है तो बीसीसीआई इस बात पर ध्यान देता है कि वह न केवल अच्छी तरह इंग्लिश बोल सके बल्कि उनका पर्सनालिटी डेवलपमेंट भी हो। इन खिलाड़ियों को मीडिया ब्रीफिंग के अलावा विदेशी दौरों में लोगों से मिलना जुलना होता है तो इंग्लिश लैंग्वेज उनकी पर्सनैलिटी और कॉन्फिडेंस को एक अलग ही लेवल पर ले जाती है।

बीसीसीआई ने न केवल भारतीय खिलाड़ियों के लिए बल्कि “भारतीय अंपायरों” के लिए भी इंग्लिश लैंग्वेज के प्रोग्राम शुरू किए हैं ताकि इंग्लिश लैंग्वेज में उनकी बातचीत का स्तर सुधर सके और वह इंटरनेशनल प्लेयर्स से बातें कर सकें। बता दे कि अंपायरों के लिए बीसीसीआई ने पहली बार साल 2015 में ऐसा कोर्स शुरू किया था।

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