जानिए आखिर जीवन के कुछ कठोर सत्य क्या हैं,जो शादी के बाद ही पता चलता है?

शादी समस्याओं की शुरूआत है। आप जब तक अकेले हैं, कैसे भी जिया जा सकता है। कहीं भी रह लें, कुछ भी खाकर पेट भर लें, कोई चिंता नहीं। शादी के बाद कम से कम एक छत चाहिए। कहीं कोई आपकी राह देख रहा है, वह परेशान न हो, इसकी आपको फ़िक्र रहेगी।

शादी से पहले सिर्फ़ एक समस्या, आपकी अबतक शादी नहीं हुई है। जिससे होगी वह पता नहीं कैसी होगी ? शादी के बाद जीवनसाथी और उसके गुण दोष नजर आएंगे। उसे ख़ुश और संतुष्ट रखने के साथ साथ दोनों परिवारों की मान मर्यादा का ख़ुद शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कष्ट सहकर भी ध्यान रखना होगा।

विपरीत माहौल में भी चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना होगा। क्योंकि सभी यही चाहते हैं।

शादी से पहले आप आजाद जिन्दगी जीते हैं, लेकिन शादी के बाद आपको जीवनसाथी तथा परिवार के दूसरे सदस्यों के अनुसार जीना पड़ता है। दफ़्तर में छुट्टी होने पर भी आप अपना दिन अपने अनुसार नहीं बीता सकते। अब आपका समय केवल आपका नहीं, उस पर औरों का भी हक़ है। जब छुट्टी के दिन भी अपने लिए वक्त नहीं होता तो कष्ट होता है।

शादी के बाद हरेक की अपेक्षाएं आपसे बढ़ जाती हैं, जिन्हें पूरा करने में पसीने छूट जाते हैं, पर अपेक्षाओं का अंत नहीं होता है।

अंतहीन जिम्मेदारियों का सिलसिला चलता रहता है।

बच्चे के आने के बाद ख़ुशी मिश्रित परेशानी शुरू हो जाती है। लोगों को बच्चे अच्छे लगते हैं लेकिन उनसे होने वाली परेशानी अच्छी नहीं लगती। विशेषकर तब जब बच्चा रात में घंटों जगाता है और अगले दिन आपको काम पर भी जाना होता है। बच्चा के आने के बाद आप मोह के बन्धन में बन्ध जाते हैं।

शादी से पहले आपके घरवालों को आपमें गुण ही गुण दिखता है जबकि शादी के बाद आपके नए घरवालों को आपमें गुण कम और दोष ज्यादा दिखाई देते हैं।

आप अपने माता पिता की सेवा चाहे जितनी लापरवाही से करें वे आपसे शिकायत नहीं करेंगे, आपकी स्थिति, व्यस्तता समझेंगे। लेकिन आपके ससुराल वाले आपकी परेशानियां समझते हुए भी नहीं समझेंगे। बल्कि बोलकर या मुक रहकर मन ही मन आप पर इल्ज़ाम लगाएंगे कि आपने उनका ध्यान ठीक से नहीं रखा।

उपरोक्त सभी बातें नकारात्मक हैं। क्योंकि सवाल ही ऐसा है। फ़िर भी आप शादी अवश्य करें। ज्यादा नहीं सोचें। अपनी तरफ से हर क्षेत्र में अपना शत प्रतिशत दें। जीवन में यदि केवल खुशियां ही खुशियां होंगी तो भी जीवन जीने में मज़ा नहीं आएगा। मज़ा तब अधिक आता है जब विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लिया जाए। शादी से मिलने वाली खुशियां इतनी बड़ी होती हैं कि हर इंसान अपनी संतान की शादी के सपने संजोता है। उसकी शादी हर कष्ट सह कर भी करना चाहता है और सुकून का अनुभव करता है।

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