जब शिव धनुष को कोई योद्धा हिला भी नहीं पाया तो उसको स्वयंवर सभा में कैसे लाया गया?

जिस शिव धनुष को कोई योद्धा हिला भी नहीं पाया था, उसे स्वयंवर सभा में स्वयं सीता जी ही लेकर आयी थीं।

कहा जाता है कि सीता जी भी अपने पिता राजा जनक की तरह भगवान शिव में गहरी आस्था रखती थीं। सीता जी को उनके पिता राजा जनक ने पुत्रों की भांति शस्त्र तथा शास्त्र सभी का ज्ञान दिया था।

एक बार बालपन में सीता जी ने पूजन गृह की सफाई करते हुए वहां रखे शिव धनुष को उठा कर किसी दूसरे स्थान पर रख दिया। जब राजा जनक को इस बात का पता चला तो उन्हें पहले तो विश्वास नहीं हुआ, किन्तु फिर उन्होंने सीता जी से उस धनुष को वापस उसी के स्थान पर रखने की प्रार्थना की।

पिता की आज्ञा से सीता जी ने उस धनुष को बड़ी ही सरलता से उठाकर वापस उसके पुराने स्थान पर रख दिया। जब राजा जनक ने यह स्वयं अपने नेत्रों से देखा तो उन्हें विश्वास हो गया कि उनकी पुत्री कोई साधारण कन्या नहीं है, इसलिए उसका विवाह भी किसी असाधारण पुरुष से ही होना चाहिए। इसलिए राजा जनक ने सीता जी के स्वयंवर की घोषणा की और यह शर्त रखी कि जो कोई भी पुरुष इस धनुष को उठा कर इसकी प्रत्यंचा चढ़ा पायेगा, उसी पुरुष से उनकी पुत्री सीता का विवाह होगा।

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