छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है?

भगवान राम ने हनुमानजी से कहा , भरत व्याकुल होंगें , तुम जाकर सूचना दो मैं आ गया हूँ। अभी मैं अपने मित्र निषादराज से मिलकर और ऋषि भरद्वाज का आशीर्वाद लेकर अयोध्या आऊँगा।

14 वर्ष बाद यदि हम -आप लौटते तो क्या करते ?

सीधे घर जाते या कोई दिया वचन निभाते।

वनगमन पर जाते हुये , भगवान राम निषादराज से कहे थे जब लौटूंगा तो मिलकर जायेंगे।

वनगमन पर ऋषि भरद्वाज ने कुशलता का आशीर्वाद दिया था ! तो यह भी आवश्यक था उनका दर्शन करते।

यह सूचना ही छोटी दीपावली है। लेकिन प्रश्न दूसरा है । 14 वर्ष बाद भी अपना वचन विस्मृत नहीं हुआ । तब , जब वनगमन का काल इतना कठिन हो , दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं क्रम हो, साथ में घर पहुँचने की व्यग्रता हो , भरत जैसा भाई प्रतीक्षा कर रहा हो! एक क्षण भी देरी हुई तो शरीर त्याग देंगें।

यही कृतज्ञता है ! जिसका इस युग मे लोप हो गया है।

आप सभी को छोटी दिवाली की शुभकामनाएं …

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