चंद्रमा एक रहस्यमयी उपग्रह, जिसका संपूर्ण अध्ययन अभी तक पृथ्वी निवासी के लिए अधूरा है।

चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह होने के साथ-साथ सभी अंतरिक्षीय विंडो में सबसे अधिक पृथ्वी के नजदीक स्थित उपग्रह है। यह पृथ्वी से जितना सुंदर और आकर्षक दिखाई देता है यह उतना ही रहस्यमयी भी है, सबसे अधिक आश्चर्य यह कि पृथ्वी निवासी हजारों प्रकाश वर्ष दूर स्थित ग्रहों और उपग्रहों का अध्ययन कर रहा है पर पृथ्वी के मात्र लगभग 3 लाख किलोमीटर दूर स्थित उपग्रह चंद्रमा का अध्ययन नहीं कर पा रहा है। अभी तक चंद्रमा का ऊपरी सतह के कुछ भाग और चांद का मात्र 51% भाग का आधा-अधूरा अध्ययन ही किया जा सका है पर ऐसा क्यों?

मानव 70-80 के दशक में चंद्रमा पर पैर रख चुका था पर उसके बाद जैसे मानव चांद पर जाना ही भूल गया जबकि 80 के दशक के मुकाबले वर्तमान की प्रौद्योगिकी 100% आगे है फिर भी ऐसा क्यों कि हम अपने पास स्टेट चांद को भूलकर दूर स्थित मंगल ग्रह पर मंगल मिशन यान भेज रहे हैं। इसका जवाब अभी भी निरुत्तर है कि ऐसा क्यों हो रहा है? अभी भी मानव चांद पर मानव मिशन के जगह सिर्फ यान को भेजने में लगा हुआ है जबकि चांद पर मानव मिशन 50 वर्ष पहले ही पूरा किया जा चुका है फिर हम अपनी उपलब्धि में पीछे क्यों जा रहे हैं हम क्यों नहीं कोशिश कर रहे हैं कि दोबारा मनुष्य आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ चांद पर पैर रखे और वहां का गहन अध्ययन करें और पूरे विश्व की सरकार है इस काम से पीछे क्यों हट रही है क्या ऐसा करने पर किसी परग्रही या दूसरे ग्रह के निवासी के दबाव में हैं इस बात को पूरा विश्व समुदाय आम लोगों से छिपा रही है आखिरकार इसमें क्या सच्चाई है? क्या 50 वर्ष बीत जाने के बाद हमें पूरा एक शताब्दी तक इंतजार करना होगा जबकि हमें प्रौद्योगिकी में पहले के मानव मिशन से अधिक आगे होना चाहिए था लेकिन हम यह सब भूल कर अब हम मंगल मिशन पर जा रहे हैं जबकि हमने अभी तक चांद का गहन अध्ययन किया ही नहीं हमें अभी चांद के रहस्य को उजागर करने के लिए अभी और प्रयत्नशील रहना होगा।

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