गुलशन कुमार जीवित नहीं हैं इसके बावजूद उनकी कंपनी “गुलशन कुमार प्रेजेंट्स” क्यों लिखती है?

गुलशन कुमार की हत्या के बाद सबको यहीं लगा था की टी-सीरीज खत्म हो जाएगा, क्योंकि गुलशन कुमार के भाई किसन कुमार इस मामले में अनुभवहीन थे और इनके बेटे भूषण कुमार उस वक्त मात्र 19 वर्ष के थे । इस तरह कॉलेज के उस छात्र से ये उम्मीद करना की आगे चलकर यही टी-सीरीज का कर्णधार बनेगा ,बेमानी थी, क्योंकि भूषण के लिए ये मौज-मस्ती वाले दिन थे उसे अपने पिता के बिजनेस की एबीसीडी भी पता नहीं थी ।

हालांकि भूषण कुमार को जब अहसास हो गया की उनके पिता ने कंपनी को जिस मुकाम पे ला खड़ा किया है उसे और शिखर तक ले जाने के लिए और उनके अधूरे सपनों को साकार करने के लिए उन्हे कुछ तो करना ही होगा। बस, उन्होने ठान लिया की किसी भी सूरत में हार नहीं माननी है। तब से भूषण में गज़ब की तब्दीली देखी गयी, अचानक से उनमे गंभीरता और जिम्मेवारी के भाव झलकने लगे। पढ़ाई को बीच में ही छोडकर उन्होंने पिता की कंपनी ज्वाइन कर ली और पिता के मैनेजर को बुलाकर निवेदन किया- “आपको पापा के साथ काम करने का गहरा अनुभव है,आप कंपनी छोडकर कहीं नहीं जाएँ, मुझे मार्गदर्शित करें, कंपनी से जुड़े सभी लोग एक परिवार की तरह हैं ,हम सब मिलकर पापा के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे” उसके बाद से भूषण कुमार ने कंपनी के लिए जी-जान लगा दी। हालांकि अब भी बहुतों को इनपर विश्वास नहीं था, और उन्होने कंपनी को अलबिदा तक कह दिया । उनमे से कई तो ऐसे भी थे जिन्होने गुलशन कुमार के साथ ढेरों काम किया था, और कुछ ऐसे भी जिन्हें गुलशन कुमार ने पहला मौका दिया था।

आज म्यूजिक इंडस्ट्रीज में टी-सीरीज का प्रभाव 85 प्रतिशत हो गया है, और इनका बिजनेस 25 से अधिक देशों में फैल चुका है। यूट्यूब पर इनका चैनल आज भी सबसे ज्यादा देखा जाता है, साथ ही कोई ऐसा म्यूजिक अवार्ड फंक्शन नहीं हो जिसमे टी-सीरीज की सहभागिता नहीं दिखे।

इन सब उपलब्धियों के पीछे भूषण कुमार का ही योगदान है। पर भूषण आज भी इसके लिए अपने पिता को श्रेय देते हैं, और उनकी उपस्थिती महसूस करते हैं। उनका मानना है की कंपनी के लिए वो कुछ नहीं करते सबकुछ उनके पिता करते हैं, वे तो जरिया मात्र हैं। इसलिए आज भी टी-सीरीज की किसी भी फिल्म या संगीत में “गुलशन कुमार प्रेजेंट्स” ही लिख कर आता है। भूषण कुमार कहते हैं ये परम्परा सदियों तक जारी रहेगी, भले ही कंपनी कोई भी चलाये, लेकिन नाम हमेशा गुलशन कुमार का ही आएगा।

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