गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाने का महत्व क्यों है ?

मोद का अर्थ है-आनंदायक। प्रसन्नता देने वाला। मोदक ज्ञान का प्रतीक है। इसका गहरा अर्थ यह है कि तन का आहार हो या मन के विचार वह सात्विक और शुद्ध होना जरुरी है। तभी आप जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं

मान्यता है कि एक बार गणेश जी के पेट में भयंकर जलन होने लगी, तो कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा घास की 21 गांठे बनाकर खाने को दी, दूर्वा के औषधिय गुणों से गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं।

श्री गणेश जी को दुर्बा की माला अर्पित करने से जलने-कुढ़ने वाले लोग शांत हो जाते हैं।

दुर्बा एवं कुशा का जल नित्य सुबह खाली पेट पीने से पेट की जलन, केंसर, मधुमेह आदि तकलीफों से मुक्ति दिलाता है।

35 तरह के रोगों का विनाशकारी मोदक। सँक्रमण रोगों को मिटाने वाला

आयुर्वेदिक गुडुची मोदक (लड्डू)

जिसे खुद भी खाएं औऱ गणपति जी को भी अर्पित करें।

बेहतरीन इम्युनिटी बूस्टर होते हैं

गिलोय, गुड़-मेवा के लड्डू

उत्सव के समय घर-घर में बहुत ही उत्साह के साथ एवं उत्तर भारत में गुड़-मेवा के लड्डू ज्यादा प्रचलित हैं। ये लड्डू जन्माष्टमी के समय सोंठ – मेवा, गणेश चतुर्थी को गुड़ के मोदक तथा मकर संक्रांति के दिन तिल और मूंगफली डालकर बनाए जाते हैं।एक विशेष स्वास्थ्यवर्धक जानकारी-पहलीबार जिससे आप भी स्वस्थ्य रहेंगे और बरसेगी श्री गणेशजी की अटूट कृपा——-
निम्नलिखित सामग्री एकत्रित करें….गुड़ के लड्डू बनाने की विधि-कटोरी नारियल बुरादा 50 ग्रामकटोरी बादाम टुकड़ा 50 ग्रामछुहारे बारीक़ कटे हुए 100 ग्राममखाने टुकड़े 50 ग्रामकाजू टुकड़े 100 ग्रामकिसमिस 100 ग्रामचिरौंजी 25 ग्राममगज तरबूज बीज 100 ग्रामखसखस दाना 50 ग्रामगोंद टुकड़ा 35 ग्रामदेशी घी 300 से 500 ग्रामउपरोक्त सभी मेवा देशी घी में पाककरगुड़ कुटा हुआ 1किलोगुड़ की चाशनी में मिलाये।बचा हुआ देशी घी लड्डू के समान में ही मिला लें।

गुनगुना रहने परइलायची पाउडर 10 ग्रामकेशर एकग्राम,अमृतम मुलेठी चूर्ण 20 ग्रामअमृतम त्रिकटु चूर्ण 50 ग्रामअमृतम आंवला चूर्ण 50 ग्राममिलाकर अपने घर पर ही लड्डू बनाएं।सेवन विधि-एक लड्डू रोज दूध के साथ सुबह लेवें।इसे भोजन के साथ भी लिया जा सकता है।वातरोगों एवं थायराइड में यह विशेष लाभप्रद है।गुड़ तेरे नाम अनेक-आयुर्वेद में गुड़ को अमृतम कहा गया है।संस्कृत : गुड (शाब्दिक अर्थ : ‘गेंद’)बंगाली, असमिया, ओडिया, भोजपुरी, मैथिली,नेपाली : भेलीराजस्थानी : गोल गूलमराठी : गुळउर्दू, पंजाबी : गुड़सिन्धी : गुढ़ (ڳُڙ)कोंकनी : गोडमलयालम : शर्क्करा या चक्करगुजराती : गोल (ગોળ)कन्नड : बेल्ल (ಬೆಲ್ಲ)तेलुगु : बेल्लम् (బెల్లం)तमिल : वेल्लम् (வெல்லம்)सिंहल : हकुरु (හකුරු)पढ़े अमृतमपत्रिका

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