खट्टी इमली की कुछ अनोखी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

इमली का नाम याद आते ही मुंह खट्टे पन का स्वाद आने लगता है। इमली स्वाद में अच्छी होने के साथ-साथ गुणकारी भी मानी जाती है। इमली बड़े-बड़े वृक्षों पर लगती है और जिससे कई सारी चीजें भी बनाई जाती हैं।

इमली का वृक्ष बहुत बड़ा होता है जिसमें बड़ी-बड़ी शाखाएं होती हैं। इमली का पेड़ कभी-कभी 60 से 80 फुट तक ऊंचा हो जाता है और यह काफी घना व छायादार दिखाई देता है। इमली के साथ-साथ के पत्तों का स्वाद भी खट्टा ही होता है।

बरसात के मौसम में वृक्षों पर नए पत्ते आते हैं और इसी के बाद ही पेड़ों पर फूल खिलते हैं। इमली के पेड़ में सफेद लाल और पीले फूलों की अधिकता होती है। फूलों से मीठी मीठी सुगंध निकलती है।

इमली के पेड़ के लिए बीज से तैयार पोधे को लगाया जाता है और लगभग 8 साल बाद वह फूल देना शुरू करता है। मार्च-अप्रैल में फल पक जाते हैं।इमली का फल शुरुआत में हरा दिखाई देता है जो बाद में पकने के बाद भूरे रंग का दिखने लगता है।

इमली के पकने के बाद उसके ऊपर का छिलका फट जाता है और अंदर के फल को उपयोग में लिया जाता है। इस फल के अंदर बीज होते हैं जिन से तेल निकाला जाता है और इसकी छाल भी उपयोग में ली जाती है।

आयुर्वेद में भी इमली को रोग विकारों को नष्ट करने वाली औषधि के रूप में बताया है। हृदय के लिए इमली का उपयोग लाभकारी माना जाता है। कच्ची इमली वायु नाशक, कफ नाशक और पित्त नाशक होती है।

इमली का उपयोग ज्यादातर खाद्य पदार्थों में भी होता है। इमली की लकड़ी बहुत मजबूत होती है और इससे बने फर्नीचर बहुत वर्ष तक मजबूत बने रहते हैं। इसकी लकड़ी जलने में भी अच्छी होती है। इसकी जली हुई लकड़ी से निकले कोयले को नीम का कोयला कहा जाता है।

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