क्रिकेट में सफ़ेद चमड़े की गेंद और लाल चमड़े की गेंद में क्या फर्क़ होता है?

ये है सफेद गेंद-

सफेद गेंद की धागे की सिलाई कम रहती है। कम सिकाई होने के कारण यह गेंद जल्दी फट जाती है। इसलिए इस गेंद को छोटे फॉरमैट यानी 20 या 50 ओवरों के खेल में इस्तेमाल किया जाता है। यह गेंद गेंदबाज़ों को स्वीइंग भी कम प्रदान करती है क्योंकि चिकनी सतह में हवा का प्रभाव कम होता है।

आइए अब लाल गेंद देखें-

लाल गेंद में सिलाई की परत अधिक होती है और इसी वजह से इसका प्रयोग टेस्ट क्रिकेट में होता है। यह ज़्यादा समय तक टिकती है।

इसके अतिरिक्त अधिक धागे होने के कारण स्पिन गेंदबाज़ों को बॉल मज़बूती से पकड़ने में आसानी होती है और ये बाल स्विंग भी प्रदान करती है क्योंकि सतह में हवा का प्रभाव अधिक होता है।

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