क्यों और किस तरह से मनाई जाती है नाग पंचमी जानिए इसके बारे में

हिंदू धर्म में श्रवण मास का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस महीने शिव जी की श्रद्धा पूर्वक पूजा की जाती हैं। इसके अलावा यह महीना नाग पंचमी के लिए भी खास माना जाता है क्योंकि हिंदू धर्म में नागपंचमी का त्योहार बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को पूर्वांचल क्षेत्रों में एक बड़े पर्व के रूप में मनाते है।हिन्दू लोग नागपंचमी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाते है। ये त्यौहार श्रावण महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

मनाने का तरीका:
इस दिन घरों में अलग-अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं जिनमें से सबसे अधिक बनाए जाने वाले हैं सिंवई के साथ गेंहू चने को उबालकर खाया जाता है। कुछ लोग इस दिन खीर बनाकर पूजा करते है।इस दिन सभी लोग मंदिरों में जाकर शिव जी की पूजा आराधना करते है और भगवान भोले भंडारी के भक्त नाग को दूध पिलाने की मान्यता या रिवाज को पूरी तरह निभाते है।

महिलाएं भी मंदिरों में कटोरे या किसी पात्र में दूध जरूर रखकर आती है। कहा जाता है की काले साँप अर्थात सर्प आकर उस दूध को पीकर जाते है क्योंकि श्रद्धा और शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि शिव मंदिरों में काले सर्पाें का वास आवश्य होता है। इसलिये लोगों ने दूध पिलाने का रिवाज बना रखा है। इस विशेष त्यौहार पर घरों के लिए मुख्य दरवाजे पर महिलाएं गोबर से सांप यानी नाग नागिन बनाती हैं और खीर से अथवा दूध से बनी चीजों से उन्हें भोग भी लगाती हैं। भोग लगने के बाद में घर में पूजन होता है इसके पश्चात घर के लोग खाना ग्रहण करते हैं।

जानिये नागपंचमी की मान्यताएं:
नागपंचमी का त्योहार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है और नागों को देवता के रूप में पूजा जाता है इसलिये इस पंचमी को नागपंचमी कहते है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग है, पंचमी नागों की तिथि कही जाती है। पंचमी वाले दिन नागों की पूजा करने वाले व्यक्ति को इस दिन भूमि नहीं खोजने चाहिए।

इस व्रत में चतुर्थी के दिन एक बार खाना खाने के बाद पंचमी के दिन उपवास करने के पश्चात सीधे शाम को भोजन करते हैं। इस दिन लोग सोना, चांदी, लकड़ी और मिट्टी की कलम व हल्दी चंदन की स्याही से 5 फन वाले अर्थात शेषनाग रूपी पांच नाग बनाते है और खीर, कमल पंचामृत, धूप, नवैध आदि से नागों की साफ मन से विधि पूर्वक पूजा की जाती है। पूजा के बाद ब्राह्मणों को लड्डू और खीर का भोज करवाते है। बहुत श्रद्धा भाव से हिंदू धर्म में इस त्यौहार को मनाया जाता है और नाग देव को खुश करने का प्रयास किया जाता है।

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