क्या महाभारत काल में भी मच्छर हुआ करते थे या ये मच्छर कलियुग में ही पैदा हो गए?

महर्षि व्यास जी के अनुसार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग ये चार युग हैं, जो देवताओ के बारह हज़ार दिव्य वर्षो के बराबर होते हैं। समस्त चतुर्युग एक से ही होते हैं। आरम्भ सत्ययुग से होता है अंत में कलयुग होता है।

वर्तमान समय में कलयुग चल रहा है।

परम्परागत रूप से राम का जन्म त्रेता युग में माना जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में, विशेषतः पौराणिक साहित्य में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक चतुर्युगी में 43,20,000 वर्ष होते हैं, जिनमें कलियुग के 4,32,000 वर्ष तथा द्वापर के 8,64,000 वर्ष होते हैं। राम का जन्म त्रेता युग में अर्थात द्वापर युग से पहले हुआ था।

अर्थात रामायण त्रेता युग की रचना हैं। जिसे महर्षि वाल्मीकि जी ने लिखा गया है।

महाभारत महर्षि वेदव्यास के अनुसार द्वापरयुग मे हुआ था। अर्थात कलयुग से पहले।

आपका प्रश्न है कि क्या महाभारत काल में भी मच्छर हुआ करते थे या ये मच्छर कलयुग में ही पैदा हो गए ? तो मेरा उत्तर हैं कि मच्छर कलयुग(वर्तमान काल), द्वापरयुग(महाभारत काल), त्रेतायुग(रामायण काल) मे भी थे।

हम आपको इस बात का प्रमाण भी देंंगे।

रामायण महाकाव्य में कुल 24,000 श्लोक, 500 उपखंड तथा 7 काण्ड (अध्याय) है। इन सात काण्डो के नाम – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युदध्काण्ड) तथा उत्तरकाण्ड है। इनमें से सबसे बड़ा अध्याय बालकाण्ड तथा सबसे छोटा किष्किन्धाकाण्ड है।

पाचवें कांड(सुंदरकांड) के भाग 1 (“माता सीता की खोज मे हनुमान का लंका प्रस्थान” मे मसक(मच्छर) का जिक्र हुआ है।

“मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी॥ नाम लंकिनी एक निसिचरी। सो कह चलेसि मोहि निंदरी॥1॥

भावार्थ— हनुमान जी मच्छर के समान(छोटा सा) रूप धारण कर नर रूप से लीला करने वाले भगवान्‌ श्री रामचंद्रजी का स्मरण करके लंका को चले (लंका के द्वार पर) लंकिनी नाम की एक राक्षसी रहती थी। वह बोली- मेरा निरादर करके (बिना मुझसे पूछे) कहाँ चला जा रहा है?॥1॥”

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