क्या भगवान राम मांस खाते थे? अगर नहीं तो सीता हरण के समय हिरण का शिकार करने क्यों गए थे?

आप लोगो ने शूटिंग रेंज देखी होगी जिसमें निशानेबाजी का अभ्यास किया जाता है, कुछ मीटर की दूरी पर एक टारगेट या लक्ष्य होता है जिसको बंदूक या तीर से वेधना होता है जैसा चित्र में है वैसे कुछ होता है।

अब यदि सैनिकों की बात करे तो इनके निशाने लगाने के लिए पुतले की व्यवस्था की जाती है। क्योंकि सैनिकों को ज़िन्दा आदमी से युद्ध करना होता है।
रही बात रामायण काल की उस समय असुरों ने आतंक मचा रखा था असुर एक स्थान पर ठहर नही जाएगा वो तो मायावी होते थेतो राजकुलों के बालको को जीवित गतिशील जानवरो पर अभ्यास करवाया जाता था, आत्मरक्षा के लिये ऋषियों के यज्ञ के रक्षा करने के लिए सबके लिये शिकार करने की कला आना आवश्यक था।
ये भी हो सकता है हल्की सी चोट से शिकार कर के पकड़ के ले आते और कुटिया के बाहर सुंदर सा हिरण रखते, जैसे ऋषियों के आश्रम में गाय मोर घोड़े हाथी मछलियों को पाला जाता था। हम लोगो के यहां जानवर पाले भी जाते हैं आवश्यक नही है सारे जानवर खाये जाएं।
एक टिप्पणी के अनुसार एक बदलाव किया जाना आवश्यक है भगवान के पास किसी को बांधने के लिये पाश (नाग पाश)नामक बाण होते थे वो उस हिरण को घायल न कर के बांध के ले आते।
अब ये बिल्कुल आवश्यक नही है कि निशांनेबाज़ी करने वाले शूटर्स “टारगेट” या सैनिक “पुतला” खा जाए वो दूसरों के लिए भी काम मे आता है।
ऐसी ही जिन जानवरो का वध किया जाता था उनको दूसरों जानवरो के भोजन के लिए छोड़ दिया जाता था।
ये तो हो सकता है मृगचर्म या व्याघ्रचर्म भेंट देने के लिए या प्रतीकात्मक रूप ने उतार ली जाती हो परन्तु उसके लिए भी मॉस भक्षण आवश्यक प्रतीत नही होता इसलिए ये कहना अनुचित है कि रामचंद्र जी मास खाने के लिये हिरण का शिकार करने गए थे
इसके निम्लिखित कारण है
इस नियम को भूला नही जा सकता कि वनगमन में मात्र कंद मूल तथा फलों को ग्रहण करना था अगर ऐसा न होता तो शबरी बेर क्यों खिलाती अच्छे अच्छे मांस के पकवान बनाती।
एक बात और बताना चाहती हूँ, पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु सात्विक माने जाते हैं और भगवान राम उन्ही के अवतार है तो तामसिक भोजन ग्रहण करने का प्रश्न उत्पन्न नही होता है

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