क्या खाना-खाकर भगवान की पूजा की जा सकती है?

सबसे पहले हमें ये जानने की जरूरत है कि पूजा क्या है। सही मायने में पूजा का अर्थ क्या है तभी उसका महत्व समझ पाएंगे और उसका उचित लाभ भी मिलेगा।

कभी आपने सुना है “मन चंगा तो कठौती में गंगा” यही है सही मायने में पूजा का अर्थ ।

पूजा एक तपस्या है एक साधना है जिसका बाहरी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है।

पूजा मन में उपजे एक विशाल उमंग है जिसका कोई थाह , कोई अंत नहीं होता।

आपने ये भी सुना होगा “जितनी शक्ति उतनी भक्ति” , इसके अनुसार पूजा को आपके सामर्थ्य के अनुसार परिभाषित किया गया है इसमें कोई पाबंदी नहीं है। हमारा आंतरिक मन शुद्ध होना चाहिए , हमारा मन शुद्ध रहेगा तभी हमारा पूजा भी सफल हो सकता है,अन्यथा पूजा-पाठ सब बेकार है।

अब बात आता है पूजा भूखे करें या खाकर ,तो इसके कोई पाबंदी नहीं है अगर भूखे पेट करने के सामर्थ्य हैं तो भूखे करें और सामर्थ्य नहीं है तो आप बेझिझक खाना खाकर पूजा कर सकते हैं। भगवान हर जगह हर एक कण में समाया हुआ है , भगवान के लिए हम सभी उनके बच्चे के समान है इसलिए कोई ऐसा नहीं होगा इस दुनिया में जो अपने बच्चे को दुखी करे और उसके बदले में उसे कुछ दें। ये सब हमारे मन का बहम है और कुछ नहीं , इसलिए पूजा करें अपने आत्मा को शुद्ध रखें भगवान महेश आपके साथ रहेंगे।

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