क्या कारण रहा होगा की दुनिया के सबसे आमिर व्यक्ति श्री बिल गेट ने टॉयलेट का रिसाइकल से बने पानी को पिया था ?

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने ऐसा पानी पीकर दिखाया है। गेट्स ने एक खास प्रॉजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सिऐटल की कंपनी जैनीकी बायोएनर्जी के साथ हाथ मिलाया है। कंपनी के साथ गेट्स ऐसा प्लांट डिवेलप कर रहे हैं, जो मानव के मल-मूत्र से पानी और बिजली बना सकेगा। ‘ओमनीप्रोसेसर’ नाम के इस प्लांट की संरचना और निर्माण सिऐटल की कंपनी, बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन संयुक्त रूप से कर रही है।

प्लांटमें मल-मूत्र से बने पानी को पीने के बाद बिल गेट्स ने इसे पूरी तरह से ‘प्योर’ बताया। अपने ब्लॉग पोस्ट में बिल गेट्स ने कहा, ‘इसका स्वाद ठीक उसी तरह है, जैसे किसी बोतलबंद पानी का होता है। यह कैसे बड़ी सफाई और मानकों का पालन करके बन रहा है, यह जानने के बाद इसे खुशी-खुशी रोज पीने को तैयार हूं। यह सुरक्षित है।’

जैनेकी बॉयोएनर्जी के संस्थापक पीटर जैनेकी ने प्लांट की स्थापना और उसकी लागत का अनुमान लगाने के लिए भारत और अफ्रीका जैसे देशों का दौरा किया। बिल गेट्स का कहना है कि उनका उद्देश्य इस प्लांट की लागत कम करने का है, ताकि भारत जैसे देश में कम निवेश के साथ इसे वेस्ट ट्रीटमेंट बिजनेस के रूप में भी शुरू किया जा सके।

ऐसे बनेगा पीने का पानी:

1- गंदगी मशीन से कन्वेयर बेल्ट के जरिए ड्रायर में जाती है। यहां ऊंचे तापमान पर पानी को गंदगी से अलग करते हैं।

2- ड्रायर में मल-मूत्र का पानी भाप में बदलकर पाइप के जरिए कूलिंग ट‌्यूब में चला जाता है। बाकी गंदगी सूख जाती है।

3- सूखी हुई गंदगी भट‌्टी में ऊंचे तापमान पर जलाते हैं। इससे टेम्प्रेचर-हाई स्पीड भाप बनती है जो सीधे स्टीम इंजन में जाती है।

4 – स्टीम इंजन से जुड़ा जेनरेटर चालू हो जाता है और बिजली बनाता है। बची राख कहीं भी इस्तेमाल हो सकती है।

5 – दूसरे चरण में बनी भाप, क्लीनिंग सिस्टम की पाइप्स से तब तक गुजारी जाती है जब तक स्वच्छ पानी नहीं मिल जाता।

क्या है खास:

01 लाख लोगों के मल-मूत्र से रोज बन सकेगा 86000 लीटर पीने योग्य पानी।

250 किलो वॉट बिजली उत्पन्न होगी इस प्रक्रिया में।

1000 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे तापमान पर जलाते हैं अपशिष्ट ताकि बदबू निकल जाए।

क्यों है ऐसे प्लांट की जरूरत:

हर साल गंदे पानी और अन्य गंदगी से होने वाली बीमारियों से सात लाख बच्चों की मौत होती है।

दुनिया में करीब दो अरब लोगों (पूरे विश्व की कुल जनसंख्या के 35 प्रतिशत) को साफ-सफाई की बेहतर सुविधा न होने से गंदा पानी पीना पड़ता है।

भूगर्भ जल का स्तर पूरी दुनिया में गिर रहा है। पूरी दुनिया में जल संरक्षण के तरीकों पर बड़े शोध हो रहे हैं।

कहा तो जा रहा है कि अगर हालात काबू में न आए तो तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।

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