क्या इस कारण बनाया जाता है रक्षाबंधन का त्यौहार

हमारी धार्मिक ग्रंथों में हर रिश्ते को एक विशेष महत्व दिया गया है। ऐसा ही एक त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन है। इस दिन बहनें अपने सभी भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। इसके बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

हमारे देश में यह उत्सव सदियों से बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। परंतु यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है इसके बारे में कई सारी कहानियां प्रचलित हैं। आइए हम कुछ ऐसी कहानियों के बारे में जानते हैं। जिनसे हमें यह पता लगता है कि रक्षाबंधन का उत्सव क्यों मनाया जाता है।

हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवो और दानवो के बीच कई वर्षों तक युद्ध होता रहा था। धीरे-धीरे इस युद्ध में देवता पराजय के नजदीक आने लगे। तब देवताओं के राजा इंद्र देवताओं के गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे और युद्ध में विजयी होने का उपाय पूछा।

देव गुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी इंद्राणी को अपने पास बुला कर कहा की श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन अपने तपोबल से एक रक्षा सूत्र तैयार करें। जिसे युद्ध पर जाते समय इंद्र की कलाई पर बांध दे। इंद्राणी ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों से मंत्र उच्चारण करवा कर इंद्र की कलाई पर अपने तपोबल से उत्पन्न रक्षा सूत्र को इंद्र की कलाई पर बांध दिया। जिसके बाद इंद्र ने दैत्यों को हराकर युद्ध में विजय प्राप्त की।

रक्षाबंधन की एक कहानी महाभारत काल से भी संबंधित है। इसके अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की उंगली से खून की धारा बहने लगी।

वहां पर भगवान श्री कृष्ण की मुंह बोली बहन द्रोपदी बैठी हुई थी। द्रोपदी ने तुरंत उठ कर अपने कीमती साड़ी का पल्लू फाड़ कर भगवान श्री कृष्ण की उंगली में पट्टी बांधी। जब भगवान श्री कृष्ण ने यह देखा तो भगवान श्री कृष्ण की आंखों में आंसुओं की धारा बहने लगी। उन्होंने द्रोपदी को सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दे दिया। द्रोपदी के वस्त्र हरण के समय भगवान श्री कृष्ण ने उनका अपनी रक्षा का वचन निभाया और जीवन में द्रोपदी की रक्षा करते रहे थे।

यह परंपरा सतयुग से चली आ रही है। राजा के दरबार के पुरोहित राजा और क्षत्रियों को रक्षा सूत्र बांधते थे। ताकि जब उनके धर्म, यज्ञ आदि पर मुसीबत आए तो राजा उनकी रक्षा कर सकें।

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