किसी देश को नष्ट करने के लिए भारत का गुप्त हथियार क्या है? क्या आप जानते हैं

मान लो भारत का भविष्य मे अपने जिगरी दुश्मन पाकिस्तान या चीन से युध्द हो जाता है। तो ऐसा कौनसा हथियार है, जो भारत को युध्द मे जीता सकता है। वो सिर्फ भारत के पास है, न ही तो चीन न ही पाकिस्तान के पास। अगर आप परमाणु बम के बारे मे सोच रहे है तो यह हथियार परमाणु बम नही है। क्योकि भारत, चीन, पाकिस्तान तीनो परमाणु बम से सम्पन देश है ओर युध्द मे गलती से भी परमाणु बम का प्रयोग हुआ तो क्या पाकिस्तान क्या भारत ओर चीन किसी का भी नामुननिशान नही रहेगा। क्योकि पुरी दुनिया 1945 मे जापान पर हुये परमाणु हमले का मंजर देख चुकी है ओर जापान आज तक उस हमले की त्रासदी को झेल रहा है अगर भारत या पाकिस्तान मे से किसी ने ऐसी त्रासदी सही होती तो उसे इस से उबरने मे हजारो सालो लग जाते।

आज 21वी सदी है, ओर आज अगर किसी देश को मात देनी है। तो दो चीज तुम्हारे पास होनी चाहिये। पहली जिगरी दोस्त ओर दूसरा कम्प्यूटर मे एक्सपर्ट। भारत को अपनी दोस्ती रूस, जापान, ईजराइल, व अन्य यूरोपिय देश। जितने आपके मित्र होगे, तो दुश्मन भी आपकी तरफ आँख ऊठाने से पहले 100 बार सोचेग। मुश्किल वक्त मे हथियार साथ छोड सकते है, पके यार हमेशा आपके साथ खडे नजर आयेगे। जैसे 1971 की लडाई मे अमेरिका को अपनी सेना वापिस बुलानी पडी सिर्फ रूस के भारत को लडाई का समर्थन देने पर। ये कलयुग है आपको ही अपना भला व बुरा खुद सोचना है।

दूसरी बात आपको अपनी सेना को साइबर हमले के लिये तैयार करना होगा। एक साइबर अटैक आपको कई साल पीछे धकेल सकता है जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ईजराइल ने साईबर अटैक से बहुत साल पीछे धकेल दिया। चीन ने अपने स्कूलो मे शुरूआती कक्षाओ मे कम्प्यूटर को अर्निवार्य भाषा के तोर पर लागू कर दिया । भारत इस क्षेत्र मे बहुत पीछे है आपको वक्त के साथ चलना होगा नही तो समय आपको चलने लायक नही छोडेगा।

हम मगंल पर मानव को बसाने मे लगे हुऐ है, अपनी धरती को ऊजाड कर । हजारो साल लगे हमे सभ्य बनने मे। लेकिन आज जो मै ये सभ्यता देख रहा हूँ, ये विकास का कम विनाश का परिणाम ज्यादा है। मानव सभ्यता आज बारूद के ढेर पर खडी है। एक छोटी चिंगारी सब कुछ तबाह कर सकती है।

युध्द से कभी सुनहरा भविष्य नही बन सकता। आप आसमानो मे उडान भर सकते हो, रहने के लिये घरोंदे नही बना सकते। युध्द का परिणाम मेरे दिल की आवाज ” हम इस तरह हारेगे, तुम जीत कर पछताओगे”।

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