कहानी: बेटे के लिए मां का आखिरी पत्र

विमला अपने 60 लाख के फ्लैट में अकेली रहती है उसकाबेटा अमेरिका में अपने परि वार के साथ रहता है चार पांच साल में– एक या दो बार ही आता है कभी-कभी तो साल छे महीने गुजर- ने पर भी खबर नहीं लेता है आज विमला की उम्र लगभग 70– साल हो चुकी है शान और शौकत की हर चीज उस के कमरे में मौजूद फिर भी वह अकेला महसूस करती हैं पड़ोसी भी कभी- चर्चा करते सुनाई देते हैं कितनी बेचारी है विमला जिससेमिलने कोई नहीं आता और सालों तक उसके बेटे बहू भी उसकीखबर नहीं लेते बहुत बुरा करते हैं बेचारी के साथ पहले पड़ोसी कभी कभार आ जाते थे मिलने पर अब वह भी आना जाना बंद कर चुके है.

विमला का स्वास्थ्य दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है घरमें एक बाई आती है उस की पसंद का खाना बनाने के लिए कुछ– भी उसके अंदर नहीं पचता है कभी-कभी वह सोचती है नाजाने मैंने कौन से पाप किए जिससे मेरा बुढ़ापा ऐसा कट रहा है फिर वह अपने पुराने दिनों की यादों में हो खो जाती है जब वहअपने बेटे और पति के साथ शहर में बस गई थी और अपने पति को- और अपने बेटे को दादा दादी के पास जाने से रोकती वह नहीं- चाहती थी उस को पुराने विचारों वाले दादा दादी के साथ एक– पल भी बताएं वह हमेशा से बेटे को कामयाब देखना चाहते थे- इसलिए बड़े स्कूल में पढ़ाती थी और उसे हमेशा सिखाती थी– बेटा तुम्हारा भविष्य यहां नहीं है तुम्हारा भविष्य देश के बाहर– अमेरिका में है.

जब विमला के ससुर गुजर गए उस ने अपने पति को सास को- लाने के लिए मना कर दिया और उसे वहां जाने से भी रोक नेेे–लगी यहां तक की साल में एक बार पित्र पक्ष पर होने श्राद्ध को भी अपने पति को नहीं जाने देते थी यह सब उस का बेटा बच– पन से देखता रहता था उसकी जिंदगी में पारिवारिक मूल्योंऔर संस्कारों के अलावा सब कुछ उस के मां बाप ने अंग्रेजी शिक्षा– के माध्यम से उस को दीया था इसलिए विमला का बेटा जीवन- को सिर्फ यही समझा था इस का उद्देश्य मात्र जीवन में पैसा—- कमा ना है और पारिवारिक रिश्तो संस्कारों जैसी छोटी बातों के लिए उसके पास समय नहीं था.

आज विमला की हालत ठीक उसी प्रकार हो गई थी जैसी उस- की सास की उसके बेटे बिना होती होगी विमला भी समझ रही- है घर में रीति-रिवाजों संस्कार बच्चों को बड़ों से मिलते हैं वह– इतनी जरूरी है क्योंकि रीति रिवाज संस्कार बच्चों के अंदर उन गुणों का विकास करते हैं जो पाठ शाला नहीं दे पाती इस लिए- बच्चों को सिर्फ स्कूली शिक्षा नहीं बल्कि घर के संस्कार और— मूल्य मिल कर एक अच्छा आदमी बनाते हैं विमला ने अकेले— रहते हुए अपने बेटे के नाम एक पत्र लिखा उसे अपने बिस्तर— पर रखकर अंतिम सांस ली.

जब बेटा अंतिम क्रिया के लिए आया तब उस पत्र में विमला ने- लिखा था बेटा आज जो मेरी हालत हुई है मैं नहीं चाहतीतुम्हारी भी इस लिए मैंने जो गलती की है तुम मत करना अपने बेटे को शिक्षा के साथ पारि वारिक मूल्य और संस्कारों की शिक्षा भी—अवश्य देना और मैंने तुम्हें अपने दादा दादी से अलग रखा है— उन सभी बातों की मैं तुमसे माफी मांगती हूं इस तुम्हारी गलती- नहीं है तुमने मेरे साथ वही किया जो बचपन में तुम्हें सिखाया.

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है हम अच्छी जिंदगी के लिए- अक्सर दौड़ने लगते हैं अपने माता पिता घर परिवार के रीति— रिवाज संस्कार जो पीढ़ी दर पीढ़ी हमें मिलते रहते हैं वह अपने बच्चों को नहीं सिखा पाते जिस से बच्चे आर्थिक काम याबी—- हासिल कर लेते हैं पर संस्कार और मूल्य से बहुत दूर चले जातेे हैं.

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