करवा चौथ का क्या महत्व है?

यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है और परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति होना चाहिए। मूलतः यह व्रत सुहाग की रक्षा और सौभाग्य के लिए किया जाता है। भारतीय महिलाए इस दिन संपूर्ण रूप से अपने पति के प्रति समर्पित होकर उनकी उत्तम आयु, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए व्रत करती हैं।

माना जाता है प्यार और आस्था के इस पर्व पर करवाचौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं के गृहस्थ जीवन में सुख, शान्ति, समृद्धि और सन्तान सुख मिलता है। हिन्दू महिलाएं अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ का व्रत करती हैं।

जो कोई छल-कपट को त्याग कर श्रद्धा-भक्ति से चतुर्थी का व्रत करेंगे उन्‍हें सभी प्रकार का सुख मिलेगा, इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति या होने वाले पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए।

यह पति-पत्‍नी दोनों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ करवा चौथ के दिन ही नहीं बल्‍कि हमेशा एक-दूसरे का सम्‍मान करें ताकि उनका रिश्‍ता हमेशा प्‍यार की डोर से बंधा रहे।

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