एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर कितनी कमाई होती है सरकार को? जानिए

पिछले 6 साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल को दुधारू गाय की तरह इस्तेमाल किया है। 2020 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो दशक के निचले स्तर पर चली गयी हैं, लेकिन उसका फायदा आम जनता को नहीं मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद टैक्स बढ़ता रहा और इस वजह से पेट्रोलियम सेक्टर से सरकार का राजस्व 6 साल में लगभग तीगुना हो गया। पेट्रोल-डीजल को केंद्र और राज्य सरकारें उसी तरह से टैक्स लगाकर भारी कमाई करने का साधन मानती रहीं, जैसा कि शराब में होता है।

मनमोहन सरकार के समय कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल थी और उस समय पेट्रोल पर कुल 43 फीसदी टैक्स लगता था। मोदी सरकार के कार्यकाल में तो ज्यादातर समय कच्चे तेल की कीमत नरम ही रही है। अप्रैल 2020 में तो कच्चे तेल की कीमत 18.10 डॉलर प्रति बैरल के निम्न स्तर पर पहुंच गई फिरभी इस समय भारत पेट्रोलियम पर सबसे ज्यादा 69 फीसदी टैक्स लेने वाला देश बन गया है।

जाहिर है सरकार चाहती तो वह इस गिरावट का लाभ जनता को दे सकती थी, इसके उलट सरकार हमेशा पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ा देती है ताकि कमाई ज्यादा से ज्यादा हो सके। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के मुताबिक सरकार और तेल कंपनियों को हर दिन बढ़े हुए टैक्स से 730 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसी रकम को सालाना तौर पर जोड़कर देखा जाए तो यह 2.25 लाख करोड़ रुपये हो जाती है।

इससे सरकार को कोरोना संकट से निपटने में मदद मिलेगी। इस दौर में सरकार को टैक्स से मिलने वाली आय में कमी आई है। ऐसी स्थिति में सरकार बजट संतुलन बनाने के लिए पेट्रोलियम से मिलने वाले इस अतिरिक्त कर का इस्तेमाल कर सकती है। बीते वित्त वर्ष में केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोलियम सेक्टर से कुल 5.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला था।

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