ऊंटनी के दूध से दही क्यों नहीं बन सकता? जानिए

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऊंटनी के दूध से दही तब तक नहीं बनाया जा सकता जब तक कि इसमें बकरी, भेड़ या भैंस का दूध नहीं मिलाया जाता। ज़ाहिर है कि गाय, भैंस या बकरी के दूध में ऐसा कुछ है जो दही जमने के लिए ज़िम्मेदार है।

ऊंटनी के दूध से दही पतला बनता है। इसीलिए इसे ड्रिंकिंग कर्ड कहा गया है। दही बनाने में दूध में मौजूद कुल ठोस पदार्थ, खनिज एवं कैसीन की माइसेलर संरचना काफी अहम भूमिका निभाती है।

आमतौर पर दूध से दही जमाने के लिए हम जामन का इस्तेमाल करते हैं। जामन में मौजूद बैक्टीरिया, लैक्टोस शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं। जामन मिले दूध में ये बैक्टीरिया बढ़ते जाते हैं और दूध की अम्लीयता बढ़ने लगती है। अम्लीयता बढ़ने के कारण दूध खट्टा होने लगता है। इसके अलावा, अम्लीयता में यह परिवर्तन कैसीन माइसेल को प्रभावित करता है। जिसके कारन माइसेल्स को एक-दूसरे से दूर रखने वाला बल समाप्त हो जाता है और ये आपस में चिपकने लगते हैं | कैसीन माइसेल्स का आपस में चिपककर ठोस रूप धारण करने को ही दही जमना कहते हैं। गाय और भैंस के दूध की तुलना में ऊंटनी के दूध में कैसीन के माइसेल्स बड़े होते हैं। जिस वजह से जब बड़े मायसेल्स के समूहीकरण की बारी आती है तो वे आपस में उतनी निकटता से नहीं जुड़ पाते और इसलिए दही ठोस नहीं बन पाता।

ऊंटनी के दूध के फायदे:
ऊंटनी के दूध में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। ये दिमाग के सेल्स को विकसित करने में काफी मदद करता है। अगर आप प्रतिदिन एक गिलास ऊंटनी के दूध पिते है तो इससे आपकी मेमोरी पावर मजबूत होती है, जिसके कारण आपकी याद करने की क्षमता का भी विकास होता है। ऊंटनी का दूध विटामिन और खनिज तत्व एवं कैल्शियम प्रचुर मात्र में होता है। कैल्शियम के गुणों से भरपूर होने के कारण आपकी हड्डियां मजबूत बनती हैं। साथ ही ये लंबाई बढ़ाने में भी काफी मदद करती है।

ऊंटनी के दूध के लाजवाब सामग्री:
गाय के दूध की तुलना में ऊंट का दूध खट्टा होता है, और रेगिस्तान की गर्मी के कारण, यह बहुत जल्द खराब नहीं होता है। और आइसक्रीम आसानी से बनाया जा सकता है, इसकी प्राकृतिक मिठास के कारण, थोड़ी-सी वसा के साथ और बहुत अधिक चीनी नहीं मिलाई जाती है। ऊँट के दूध से बने विभिन्न उत्पादों में आइसक्रीम के मिश्रित स्वाद, ऊँट के दूध की अलग-अलग चॉकलेट, ऊँट के दूध की चीज़, जैसे कई सामग्री शामिल हैं।

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