ईस्टर आइलैंड की मूर्तियों का रहस्य क्या है

ईस्टर आइलैंड पर विशाल पत्थर की मूर्तियां पाई जाती है, इनमे से ज्यादातर मूर्तियों का सिर्फ सिर ही जमीन के ऊपर रहता है। इन मूर्तियों की वजह से यह आइलैंड दुनियाभर में काफी ज्यादा प्रसिद्ध हो गया है। दुनियाभर के हजारो पर्यटक इन मूर्तियों को देखने के लिए आते है। आखिर इन विशालकाय पत्थरों की मूर्तियों को क्यो बनाया गया था। इस बात का अभी भी पता नही चल पाया है। ईस्टर आइलैंड लगभग 163 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहा की जनसंख्या 2017 की जनगणना के आधार पर 7750 है।

यहा पर स्पैनिश और रापा नुई भाषा बोली जाती है। ईस्टर आइलैंड पर रहनेवाले पहले के निवासियों ने इसका नाम रापा नूई रखा था। यह आइलैंड चिली देश के छेत्र में आता है। लेकिन चिली देश भी इस आइलैंड से लगभग 3686 किलोमीटर दूर स्थित है। इस आइलैंड से सबसे पास का जो देश है वो भी 1921 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसका नाम पिटकैरन है। यहा पर सिर्फ हवाई जहाज द्वारा ही पहुचा जा सकता है।

1722 में जब इस आइलैंड की खोज हुई थी, तब इस आइलैंड पर इन मूर्तियों के अलावा और कोई भी नही था। यहा पर लगभग 887 पत्थरों की विशालकाय मूर्तियां है, जिन्हें मोआई के नाम से जाना जाता है। पहले इन मूर्तियों के सिर्फ सिर ही जमीन के बाहर थे, बाद में खुदाई के बाद इनके पूरे शरीर भी मिले है। इन्हें रापा नूई लोगो ने बनाया था। लेकिन जिन्होंने इन मूर्तियों को बनाया था वो लोग कहा गायब हो गए इस बात का भी पता नही चल पाया है। इन सभी मूर्तियो में से ज्यादातर मूर्तियों के सिर को समुन्द्र की तरफ खड़ा किया गया है।

इन मूर्तियों में से जो सबसे बड़ी मूर्ति है उसकी ऊंचाई 33 फीट है, और उसका वजन लगभग 80 हजार किलो का है। इन सभी मूर्तियों को लगभग एक जैसा ही बनाया गया है। इन मूर्तियों को ज्वालामुखी के ठंडे लावे से बने पत्थरों से बनाया गया था, लेकिन जिस ज्वालामुखी के पत्थरो से इनको बनाया गया था वो इन मूर्तियों से काफी दूर स्थित है। इतनी दूर से इन मूर्तियों को कैसे लाया गया था। इस बात का भी अभी पता नही चल पाया है। इस आइलैंड का अधिकतर भाग रापा नूई राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है। वर्तमान में यह आइलैंड यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

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