इस शिवलिंग पर झाड़ू चढाने से होते है त्वचा के रोग दूर

यूं तो आपने भगवान के अनेक मंदिर देखें होंगे व उनके विभिन्न रूपों में दर्शन भी किए होंगे लेकिन क्या आपको मालूम है कि हिन्दुस्तान में भगवान शंकर का ऐसा मंदिर भी है जहां लोग भगवान शिव की अराधना करने के बाद उन्हे झाड़ू चढ़ाते हैं। शायद आप भी इस तरह के किसी मंदिर के बारे में पहली बार सुन रहे होंगे। लेकिन आपको बता दें कि यह कोई नया मंदिर नहीं है बल्कि बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर है और यहां पर आने वाले लोगों की कतारें इस मंदिर की विश्वसनीयता का व्याख्यान करती है।. यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित बीजाहोई गांव में है जहां पर आने वाले भक्तों की लंबी-लंबी कतारें बताती हैं कि इस मंदिर की भक्तों के प्रति बहुत गहरी आस्था है।

एक दिन वो किसी रास्ते से गुजर रहे थे और उन्हें प्यास लगी | पास ही किसी शिव के भक्त संत का आश्रम था | भिखारीदास जी आश्रम में पहुंचे और संत से पानी पिलाने को बोले | संत उस समय आश्रम की झाड़ू से सफाई कर रहे थे | सफाई करते करते उनकी झाड़ू व्यापारी को छु गयी | व्यापारी के शरीर में एक तरंग सी गयी और देखते ही देखते उनके त्वचा रोग ठीक हो गये | व्यापारी इस चमत्कार को देखकर संत के चरणों में पड़ गये और उन्हें धन दौलत से तोलने की बात करने लगे |

संत ने उन्हें समझाया की यह सब भोले बाबा की कृपा है और वे तो बस उनके दास है | यदि तुम कुछ करना चाहते हो तो बस इस आश्रम में शिव मंदिर बना दो | आदेश के अनुसार व्यापारी ने वहा शिव मंदिर का निर्माण किया |

व्यापारी के ठीक होने की खबर गावं में फ़ैल गयी और तब गावं वालो ने शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ाना शुरू कर दिया |

इस चमत्कार के पीछे एक कहानी बताई जाती है कि गांव में कभी एक भिखारीदास नाम का एक व्यापारी रहता था, जो गांव का सबसे धनी व्यक्ति था और वह त्वचा रोग से ग्रसित था। उसके शरीर पर काले धब्बे पड़ गये थे, जिनसे उसे पीड़ा होती थी।

एक दिन वह निकट के गांव के एक वैद्य से उपचार कराने जा रहा था कि रास्ते में उसे जोर की प्यास लगी। तभी उसे एक आश्रम दिखाई पड़ा। जैसे ही भिखारीदास पानी पीने के लिए आश्रम के अंदर गया वैसे ही आश्रम की सफाई कर रहे महंत के झाड़ू से उसके शरीर का स्पर्श हो गया। झाड़ू के स्पर्श होने के क्षण भर के अंदर ही भिखारीदास का दर्द ठीक हो गया। जब भिखारीदास ने महंत से चमत्कार के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह भगवान शिव का प्रबल भक्त है। यह चमत्कार उन्हीं की वजह से हुआ है। भिखारीदास ने महंत से कहा कि उसे ठीक करने के बदले में सोने की अशर्फियों से भरी थैली स्वीकार करे। किन्तु महंत ने अशर्फी लेने से इंकार करते हुए कहा कि वास्तव में अगर वह कुछ लौटाना चाहते हैं तो आश्रम के स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दें। कुछ समय बाद भिखारीदास ने वहां पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया। धीरे-धीरे मान्यता हो गई कि इस मंदिर में दर्शन कर झाड़ू चढ़ाने से त्वचा के रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

आज यहाँ इस तरह के हज़ारों लोग आते हैं जो त्वचा रोग से पीड़ित हैं और आसपास के लोग यह भी बताते हैं कि अधिकतर लोगों को यहाँ आने और झाड़ू चढ़ाने के बाद, इस रोग से मुक्ति भी मिलती है। लेकिन भगवान शिव की महिमा तो वैसे भी अपरम्पार है तो यहाँ लोग त्वचा रोग के अलावा, अपने और सभी दुःख भी लेकर आते हैं।

इस चमत्कारिक शिवलिंग में लाखों लोग सालभर में आते हैं और अपने दुखों से मुक्ति प्राप्त करते हैं।

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