इस मंदिर में लकड़ी की मूर्ति को 40 साल में एक बार पानी से बाहर निकाला जाता है,जानिए क्या है रहस्य

तमिलनाडु का कांचीपुरम बहुत ही पुराने मंदिरों की वजह से मशहूर है। वैसे तो कांचीपुरम में कोई 125 से ज्यादा बड़े मंदिर है। जिनका अपना अपना इतिहास है लेकिन दक्षिण भारत के कांचीपुरम में एक अद्भुत मंदिर है जिसका नाम है अथि वर्धराजा पेरूमल मंदिर। आपने कई चमत्कारी और रहस्यमई मंदिरों के बारे में सुना होगा। पर एक मंदिर ऐसा भी है जहां 10-20 साल नहीं पूरे 40 साल के बाद भगवान दर्शन देते हैं। यहां भगवान विष्णु की अथी वर्धराज के रूप में पूजा होती हैं।

अथि का अर्थ है अंजीर। यह प्रतिमा अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी है। जिसके बारे में मान्यता है कि इसे देवताओं के कारीगर भगवान विश्वकर्मा ने इसे बनाया था। जैसा कि हमने आपको बताया कि यह प्रतिमा लकड़ी की बनी हुई है यह लगातार पानी में रहती है फिर भी यह नहीं सड़ती। प्रतिमा के मूल स्वरूप में भी कभी बदलाव नहीं हुआ। प्रतिमा पर किसी तरह का लेप नहीं किया जाता जिस तरह निकाला जाता है वैसे ही इसे रख दिया जाता है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब यह प्रतिमा बनाई गई होगी तो इसमें कुछ ऐसी धातु मिलाई होगी जिसके कारण यह पानी में भी खराब नहीं होती।

इस मंदिर में स्थित भगवान वर्धराज की खास बात यह है कि यहां 40 साल बाद भक्तों को दर्शन देने आते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा हर 40 साल में पानी से एक बार निकाली जाती है और 48 दिन के लिए मंदिर में रखी जाती है। फिर अगले 40 साल के लिए सरोवर में दोबारा रख दी जाती है। अब 2059 में यह प्रतिमा 48 दिनों के लिए दोबारा निकाली जाएगी। अथी वर्धराजा पेरूमल मंदिर कांचीपुरम के मुख्य मंदिरों में से एक है। करीब 23 एकड़ के क्षेत्र में बने इस मंदिर के सरोवर सहित छोटे मंदिर भी हैं। इस मंदिर में करीब 400 पिलर वाला हॉल है यह तीन मंजिला है। कांची के अंदर आने वाले लगभग सारे रास्तों पर पुलिस तैनात है।

ज्यादातर रास्ते बड़े वाहनों के लिए बंद है। हजारों की संख्या मे जवान जगह-जगह सेवा दे रहे हैं। अथी वरदराज के लिए लोगों के मन में आस्था इस कदर है वे इसमें ना सिर्फ क्राउड मैनेजमेंट कर रहे हैं बल की यथासंभव लोगों की सहायता भी कर रहे हैं। रास्ते की व्यवस्था समझने से लेकर श्रद्धालुओं को खाना खिलाने और पानी पिलाने जैसा काम भी पुलिस के जवान पूरे जी-जान से करते हैं।

40 दिन तक भगवान अथी वर्धराज की प्रतिमा को लेटे अवस्था में रखा जाता है। अंतिम 8 दिन प्रतिमा को खड़ा रखा जाता है। यहां मान्यता है कि इसे मुगलों के आक्रमण से बचाने के लिए इस प्रतिमा को पानी में छुपा दिया गया। करीब 40 साल प्रतिमा तालाब में रही इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी धर्म करता के दो पुत्रों ने इसे तालाब से निकाला। ताकि इसकी पूजा की जा सके करीब 48 दिन तक प्रतिमा मंदिर के गर्भ गृह में रही फिर अचानक तालाब में चली गई। तब से यह तय किया गया कि भगवान की प्रतिमा को 40 साल में एक ही बार तालाब से निकाला जाएगा। जिस अनंत सरस सरोवर में भगवान की प्रतिमा रखी जाती है इसके बारे में भी कहीं रोचक तथ्य है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग बताते हैं की इस तालाब का पानी कभी कम नहीं होता।

ना ही तालाब 40 साल में कभी सूखता है। प्रतिमा निकालने के लिए ही इसे खाली किया जाता है 48 दिनों तक यह सरोवर सूखा रहता है। इस पानी को इस सरोवर के पास बने एवं दूसरे सरोवर में डाल दिया जाता है। सालाना गरुड़ महुत्सव इस मंदिर का प्रमुख त्योहार है। हर साल मई-जून में इसे काफी रंगीन व्याकरण तरीके से मनाया जाता है। इस मंदिर की भव्य सजावट की जाती है इस समय हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। वही दिसंबर जनवरी के मध्य महीने में वैकुंठ एकादशी मनाई जाती है। चलिए अब जानते हैं यहां कैसे पहुंचा जा सकता है। अगर आप वर्धराजा जी के दर्शन करना चाहते हैं पेरूमल कांचीपुरम बस स्टैंड से 5 किलोमीटर और कांचीपुरम रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मंदिर के आसपास छोटा सा बाजार भी है। आशा करता हूं यह जानकारी आपको पसंद आई होगी।

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